
ट्रे में खाया, टाइटैनिक फिल्म देखी, ऐसा गुजरा था टाइटन यात्रियों का आखिरी दिन
AajTak
टाइटन पनडुब्बी हादसे में जान गंवाने वाले पाकिस्तानी अरबपति शहजादा दाऊद की पत्नी क्रिस्टीन ने बताया है कि यात्रियों ने अपना आखिरी दिन कैसे बिताया. क्रिस्टीन ने बताया कि जब पनडुब्बी से संपर्क टूटा तो उन्हें कहा गया कि यह असामान्य नहीं है और एक घंटे के अंदर पनडुब्बी समुद्र की सतह पर वापस आ जाएगी.
टाइटैनिक का मलबा दिखाने पांच लोगों को ले गई पनडुब्बी टाइटन में विनाशकारी विस्फोट ने उनके परिवार वालों को कभी न खत्म होने वाला दर्द दिया है. पनडु्ब्बी में पाकिस्तानी अरबपति शहजादा दाऊद और उनके बेटे सुलेमान भी सवार थे. अब दाऊद की पत्नी ने बताया है कि टाइटन पर सवार होकर समुद्र तल में जाने से पहले उनके पति, बेटे और बाकी यात्रियों ने अपना आखिरी दिन कैसे बिताया.
उन्होंने बताया कि उनके पति और बेटे को अपने आखिरी दिन में पनडुब्बी के जहाज पोलर प्रिंस पर बंक बेड में रहना पड़ा और ट्रे में बफे स्टाइल में खाना पड़ा. उन्होंने बताया कि टाइटन पर सवार होकर समुद्र में जाने से पहले सभी यात्रियों को एक के बाद एक मीटिंग्स में हिस्सा लेना पड़ा. बीच-बीच में वो टाइटैनिक हादसे पर बनी प्रसिद्ध फिल्म 'टाइटैनिक' भी देख रहे थे.
टाइटन पनडुब्बी में पाकिस्तानी अरबपति और उनके बेटे के अलावा पनडुब्बी बनाने वाली कंपनी ओशन गेट को सीईओ स्टॉकटन रश, ब्रिटिश अरबपति बिजनेसमैन हार्मिश हार्डिंग और फ्रेंच एक्सप्लोरर पॉल ऑनरी नार्जेलेट सवार थे.
शहजादा दाऊद की पत्नी ने बताया कि पोलर प्रिंस पर तंग कमरों में रहने, ट्रे में खाना खाने और लगातार मीटिंग्स के बावजूद भी उनके पति और बेटे टाइटैनिक की अपनी यात्रा को लेकर काफी खुश थे.
द न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि पांचों यात्रियों ने अपना आखिरी वक्त संभवतः अंधेरे में अपना पसंदीदा गीत सुनते हुए बिताया. अखबार ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि आखिरी वक्त में सभी यात्री भयानक बायोलुमिनसेंट समुद्री प्राणियों से घिरे हुए थे जो प्रकाश का उत्सर्जन करते हैं.
शहजादा दाऊद के टाइटैनिक प्रेम ने ले ली उनकी जान

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद जायेद अल नहयान के भारत दौरे ने पाकिस्तान में फिर से पुरानी डिबेट छेड़ दी है. पाकिस्तान के विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तानी नेतृत्व की वजह से हमें भारत की तुलना में हमेशा कमतर आंका जाता है. पाकिस्तान में इस दौरे को मिडिल ईस्ट मे पैदा हुए हालात और सऊदी अरब -पाकिस्तान के संबंधों के बरक्श देखा जा रहा है.

यूरोप में कुछ बेहद तेजी से दरक रहा है. ये यूरोपीय संघ और अमेरिका का रिश्ता है, जिसकी मिसालें दी जाती थीं. छोटा‑मोटा झगड़ा पहले से था, लेकिन ग्रीनलैंड ने इसे बड़ा कर दिया. डोनाल्ड ट्रंप लगातार दोहरा रहे हैं कि उन्हें हर हाल में ग्रीनलैंड चाहिए. यूरोप अड़ा हुआ है कि अमेरिका ही विस्तारवादी हो जाए तो किसकी मिसालें दी जाएंगी.

डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहते हैं. उनका मानना है कि डेनमार्क के अधीन आने वाला यह अर्द्ध स्वायत्त देश अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है. इसे पाने के लिए वे सैन्य जोर भी लगा सकते हैं. इधर ग्रीनलैंड के पास सेना के नाम पर डेनिश मिलिट्री है. साथ ही बर्फीले इलाके हैं, जहां आम सैनिक नहीं पहुंच सकते.

गुरु गोलवलकर मानते थे कि चीन स्वभाव से विस्तारवादी है और निकट भविष्य में चीन द्वारा भारत पर आक्रमण करने की पूरी संभावना है. उन्होंने भारत सरकार को हमेशा याद दिलाया कि चीन से सतर्क रहने की जरूरत है. लेकिन गोलवलकर जब जब तिब्बत की याद दिलाते थे उन्हों 'उन्मादी' कह दिया जाता था. RSS के 100 सालों के सफर की 100 कहानियों की कड़ी में आज पेश है यही कहानी.









