
ज्ञानवापी परिसर में 500 साल में आया ये बदलाव! 828 साल के ठाठ की ठसक ठिठक गई!
AajTak
ज्ञानवापी परिसर में 500 साल में कई बदलाव देखने को मिल गए हैं. साल 1669 की जनवरी में ज्ञानवापी परिसर आखिरी बार प्रत्यक्ष और भयानक हमले का शिकार हुआ. तब से मई 2022 तक कमोबश वही स्थिति थी जो 353 साल पहले बनी थी.
साल 1669 की जनवरी में ज्ञानवापी परिसर आखिरी बार प्रत्यक्ष और भयानक हमले का शिकार हुआ. तब से मई 2022 तक कमोबश वही स्थिति थी जो 353 साल पहले बनी थी. हालांकि काशी के विश्वेश तीर्थ से भगवान विश्वेश्वर को तो 1669 से भी 475 साल पहले 1194 में ही विस्थापित कर दिया गया था. लेकिन अब 21 मई 2022 को शायद समय का चक्र घूम गया.
पिछले साढ़े तीन सौ सालों से चली आ रही ठसक ठिठक गई. गुजरी साढ़े तीन सदियों से लगातार बेरोकटोक मस्जिद में आने जाने वजू नमाज पर मानों पहरा लग गया. मस्जिद के लाउड स्पीकर से ऐलान करना पड़ा कि ज्ञानवापी में अब बस करें! मस्जिद में जगह भर गई है. वजू करने की जगह सील है. घरों से वजू करके आएं. बेहतर होगा कि मोमिन अपने घरों के आसपास गली मुहल्लों की मस्जिदों में ही जुमे की नमाज अदा करें. अल्लाह के सभी घर एक से ही हैं. अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है कि इतिहास जब करवट लेता है तो शाही और हुक्मरानी ठाठ की ठसक भी ऐसे ही ठिठक जाती है.
अब बेरोकटोक आवाजाही पर विश्वेश्वर का पहरा है. विश्वेश्वर अकेले नहीं सौ डेढ़ सौ गणों के साथ वहां चौबीस घंटे रहेंगे. सीसीटीवी कैमरों की निगहदारी में बाबा के गण चाक चौबंद रहेंगे. सुप्रीम कोर्ट से लेकर जिला अदालत तक के आदेश के मुताबिक ' शिवलिंग' की जटिल सुरक्षा होगी. जब 'वापी' भी सील हो गई तो सबके ज्ञान चक्षु भी खुल गए. क्योंकि सुरक्षाकर्मियों में से कई तिलक शिखाधारी भी हो सकते हैं. इस भीषण गर्मी और ऊमस में तरबतर वर्दी के ऊपर गले में गमछा डाले पुलिस वाले!
अदालत में भी मस्जिद के पैरोकारों ने माई लॉर्ड से गुहार लगाई कि जब नमाजियों को इजाजत मिल ही गई है पांच वक्त नमाज अदा करने की तो वजू के लिए भी सरोवर के आसपास लगे नल खुलवा दिए जाएं. वाक्य पूरा होने से पहले ही यूपी सरकार की पैरवी कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कड़ी आपत्ति करते हुए कहा कि इंतजाम तो डीएम साहब ने तीन दिन पहले ही करा दिए हैं.
अब कल्पना कीजिए कि कोई ' आगंतुक' या ' नमाजी' उत्सुकता या चिढ़ से 'वापी या शिवलिंग' की ओर घूर कर भी देखेगा तो सुरक्षा कर्मी घुड़क देंगे - आगे बढ़ो यहां क्या है? तुम्हारे काम का कुछ नहीं है यहां! आगे चलिए.. चलिए...
पहले पूरा अहाता अपना था अब ठसक से कानूनी तौर पर वहां जगह घिर गई है. किलेबंदी भी हो गई. अदालतों और कानूनी प्रक्रिया की रफ्तार के बारे में तो सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने ही एक मुकदमे की सुनवाई के दौरान टिप्पणी की थी कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं पर पैर छोटे होते हैं. हमारे तो ज्ञान चक्षु तभी खुल गए थे और साफ साफ दिख गया और दिमाग में छप गया कि यही वजह है कि एक बार मामला अदालत में चला जाए तो फिर इतना धीरे धीरे शनै: शनै: क्यों चलता है बिलकुल शनि की चाल से!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान जंग पर राज्यसभा में कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे इस युद्ध को तीन हफ्ते से ज्यादा का समय हो चुका है. इसने पूरे विश्व को गंभीर ऊर्जा संकट में डाल दिया है. इसका असर भारत पर भी पड़ रहा है. गल्फ देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं, वहां काम करते हैं. उनके जीवन की रक्षा भी भारत के लिए चिंता का विषय है. होर्मुज स्ट्रेट में बड़ी संख्या में जहाज फंसे हैं. उनके क्रू मेंबर्स भी अधिकतर भारतीय हैं. यह भी भारत के लिए चिंता का विषय है. ऐसे में जरूरी है कि भारत के इस उच्च सदन से दुनिया में संवाद का संदेश जाए. हम गल्फ के देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं. हम ईरान, इजरायल और अमेरिका के साथ भी संपर्क में हैं. हमने डीएस्केलेशन और होर्मुज स्ट्रेट खोले जाने पर भी लगातार बात की है. भारत ने नागरिकों पर, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर पर, एनर्जी और ट्रांसपोर्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों का विरोध किया है.

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) ने 10वीं कक्षा का फाइनल रिजल्ट 2026 घोषित कर दिया है. इस वर्ष लगभग 10 लाख छात्र परीक्षा में शामिल हुए. परिणाम आधिकारिक वेबसाइट rajeduboard.rajasthan.gov.in और rajresults.nic.in पर लाइव कर दिए गए हैं. बोर्ड ने मूल्यांकन प्रक्रिया रिकॉर्ड समय में पूरी की है ताकि नया शैक्षणिक सत्र एक अप्रैल से शुरू हो सके.











