
'जोशीमठ की जड़ कमजोर, छेड़ा तो आएगी तबाही', 47 साल पहले ही दे दी गई थी चेतावनी
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उत्तराखंड के जोशीमठ में जमीन धंसने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं. यहां के सिंहधार वॉर्ड में भगवती मंदिर धराशायी हो गया. यह तबाही की पहली घटना है. यहां के करीब 603 घरों में दरारें आ चुकी हैं. जमीनें फंट रही हैं. लेकिन जोशीमठ के ऐसे हालात के लिए आज से करीब 47 साल पहले सरकार को चेता दिया गया था. मिश्रा आयोग की रिपोर्ट ने विस्तार से जोशीमठ में आने वाले खतरे को बताया था लेकिन सरकार ने रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया था.
उत्तराखंड के जोशीमठ में धरती जगह-जगह धंस रही है. सैकड़ों घरों में दरारें आ गई हैं. हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि घर के घर कभी भी भरभराकर गिर सकते हैं. जोशीमठ के लोग बुरी तरह सहमे हुए हैं. इस घटना पर देश ही नहीं दुनियाभर के कई देशों के पर्यावरणविदों की नजर है. लोगों के बीच बस यही सवाल हो रहा है कि आखिर यहां धरती धंस क्यों रही है?
जोशीमठ में ही एनटीपीसी पावर प्रोजेक्ट के टनल में निर्माणकार्य चल रहा है. ऐसे में क्यों कहा जा रहा है कि इस टनल के कारण जोशीमठ में ऐसी घटनाएं हो रही हैं लेकिन NTPC ने तपोवन विष्णुगार्ड परियोजना में ब्लास्टिंग न कर TVM मशीन का उपयोग किया ताकि ब्लास्टिंग से होने वाला नुकसान जोशीमठ को प्रभावित न कर सके. काम तब तक ठीक तरह से चलता रहा जब तक TVM मशीन सुरंग बनाती रही लेकिन 2009 में सुरंग का 11 किमी. काम हो जाने के बाद TVM खुद जमीन में धंस गई.
24 सितंबर 2009 को पहली बार टीवीएम अटकी. इसके बाद इस मशीन से 6 मार्च 2011 में फिर से काम शुरू हुआ. 1 फरवरी 2012 को फिर बंद हुई, 16 अक्टूबर 2012 को फिर शुरू हुई लेकिन 24 अक्टूबर 2012 को फिर बंद हुई. इसके बाद 21 जनवरी 2020 में 5 दिन टीवीएम चली. उसने करीब 20 मीटर तक सुरंग को काटा इसके बाद से वह बंद है. एनटीपीसी के इस प्रोजेक्ट के अलावा जोशीमठ में हेलंग मारवाड़ी बाईपास का भी विरोध हो रहा है.
मोरेन पर बसाेहोने के कारण अतिसंवेदनशील है जोशीमठ
दरअसल मिश्रा आयोग की रिपोर्ट ने 1976 में कहा था कि जोशीमठ की जड़ पर छेड़खानी जोशीमठ के लिए खतरा साबित होगा. इस आयोग द्वारा जोशीमठ का सर्वेक्षण करवाया गया था, जिसमें जोशीमठ को एक मोरेन में बसा हुआ बताया गया (ग्लेशियर के साथ आई मिट्टी) जो कि अति संवेदनशील माना गया था. रिपोर्ट में जोशीमठ के निचे की जड़ से जुड़ी चट्टानों, पत्थरों को बिल्कुल भी न छेड़ने के लिए कहा गया था. वहीं यहां हो रहे निर्माण को भी सीमित दायरे में समेटने की गुजारिश की गई थी, लेकिन आयोग की रिपोर्ट लागू नहीं हो सकी.
जोशीमठ में एक ओर जहां NTPC की 520 मेगावॉट की परियोजना पर काम चल रहा है तो वहीं दूसरी ओर हेलंग मारवाड़ी बाईपास का निर्माण भी शुरू हो गया है. ऐसी परियोजनाओं को रोकने के लिए कई बड़े आंदोलन भी किए गए थे लेकिन सरकार ने ध्यान नहीं दिया. इसी दौर में जोशीमठ में नए सिरे से जमीन धंसने की घटना शुरू हो गई है.

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