
जापान के भूकंप प्रभावित क्षेत्र में बिजली, दूरसंचार सेवाएं अब भी बाधित
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बता दें कि 11 मार्च, 2011 को जापान के उत्तर-पूर्वी हिस्से में एक बड़ा भूकंप और सुनामी आई थी. इस त्रासदी में लगभग 20,000 लोग मारे गए थे. फुकुशिमा न्यूक्लियर पावर प्लांट पर भी खतरा मंडराने लगा था.
साल 2024 के पहले दिन जापान में 7.6 तीव्रता का भूकंप आया. जापान में 1 जनवरी को 90 मिनट के अंदर रिक्टर स्केल पर 4.0 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंप के 21 झटके महसूस किए गए. एक भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.6 मापी गई. भूकंप की वजह से मध्य जापान के इशिकावा प्रान्त के निवासियों को अब भी बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है. इसके अलावा संचार सेवा भी ठप है. इशिकावा के अनामिज़ु टाउन में, बिजली कर्मचारी ट्रांसमिशन लाइनों की मरम्मत कर रहे हैं. स्थानीय बिजली ऑपरेटर के मुताबिक, अकेले अनामिज़ू में 1,900 घरों में बिजली नहीं थी, और इशिकावा प्रान्त में लगभग 20,000 घरों में बिजली नहीं है.
जापान ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (एनएचके) के अनुसार, इशिकावा के वाजिमा और सुजु शहरों में भी हजारों उपभोक्ताओं के पास बिजली की पहुंच नहीं है. हालांकि, वाजिमा और सुज़ु में मोबाइल फोन सिग्नल अभी भी उपलब्ध नहीं हैं. इसके अलावा सड़क की मरम्मत की वजह से यातायात सेवा भी बाधित है. रविवार तक इस आपदा में कम से कम 128 लोगों की जान चली गई. इस बीच, कम से कम 195 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं.
भारतीय दूतावास ने भूकंप के बाद इमरजेंसी हेल्पलाइन सर्विस शुरू की. दक्षिण कोरिया के मौसम विज्ञान ने बताया था कि जापान में आए भूकंप के बाद पूर्वी तट पर गैंगवोन प्रांत के कुछ हिस्सों में समुद्र का जल स्तर बढ़ सकता है. एनएचके पर प्रसारित एक वीडियो संदेश में जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने कहा था कि अधिकारी भूकंप से हुए नुकसान आकलन कर रहे हैं.
जांच में सुरक्षित पाए गए जापान के न्यूक्लियर पावर प्लांट जापान के परमाणु प्राधिकरण के मुताबिक, तटीय इलाकों में स्थित परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में किसी भी अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई है. इनमें फुकुई प्रांत में कंसाई इलेक्ट्रिक पावर के ओही और ताकाहामा न्यूक्लियर पावर प्लांट के पांच एक्टिव रिएक्टर भी शामिल हैं. इशिकावा के होकुरिकु में स्थित शिका प्लांट ने नियमित निरीक्षण के लिए भूकंप आने से पहले ही अपने दो रिएक्टरों को बंद कर दिया था. यह न्यूक्लियर पावर प्लांट भूकंप के केंद्र के सबसे करीब स्थित था. अधिकारियों के मुताबिक इस पर भूकंप का कोई प्रभाव नहीं देखा गया.
बता दें कि 11 मार्च, 2011 को जापान के उत्तर-पूर्वी हिस्से में एक बड़ा भूकंप और सुनामी आई थी. इस त्रासदी में लगभग 20,000 लोग मारे गए थे. फुकुशिमा न्यूक्लियर पावर प्लांट पर भी खतरा मंडराने लगा था.

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