
जंग में 'सेफ जोन' पर अटैक से चौतरफा घिरा इजरायल, जानें- रफाह में कैसे हैं ताजा हालात
AajTak
पिछले साल सात अक्टूबर से शुरू हुई इजरायल और हमास की जंग अब और खतरनाक होती जा रही है. बीते तीन हफ्तों से इजरायली सेना ने रफाह में ऑपरेशन तेज कर दिया है. रफाह वो शहर था जहां गाजा के 10 लाख से ज्यादा शरणार्थियों ने शरण ले रखी थी. ऐसे में समझना जरूरी है कि आखिर रफाह में इजरायली सेना ने हमले तेज क्यों कर दिए?
गाजा पट्टी के रफाह शहर में हालात बिगड़ते जा रहे हैं. तीन हफ्ते से इजरायली सेना यहां ताबड़तोड़ हमले कर रही है. इजरायली हमलों के कारण रफाह में रहने वाले लोगों की हालत बिगड़ती जा रही है.
न्यूज एजेंसी एपी के मुताबिक, गाजा के हरेक एंट्री प्वॉइंट्स पर इजरायली सेना तैनात हैं. इस कारण यहां मानवीय सहायता भी नहीं पहुंच पा रही है. इससे पता चलता है कि इजरायली सेना रफाह में जमीनी हमले और तेज करने जा रही है.
एक ओर, रफाह में कार्रवाई को लेकर दुनियाभर में इजरायल की निंदा हो रही है. दूसरी ओर, इजरायल का कहना है कि हमास के खात्मे तक जंग जारी रहेगी.
गाजा पट्टी में रफाह इकलौता ऐसा शहर था, जहां लाखों फिलीस्तीनियों ने शरण ले रखी थी. इतना ही नहीं, रफाह से ही पूरी गाजा पट्टी में मानवीय सहायता भी पहुंचाई जा रही थी. ऐसे में सवाल उठता है कि इजरायली सेना ने रफाह में इतनी सख्त कार्रवाई क्यों कर रही है?
रफाह पर हमलों के पीछे इजरायल का मकसद क्या?
रफाह पर इजरायली सेना का ऑपरेशन 6 मई से शुरू हुआ है. लेकिन इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 9 फरवरी को रफाह में ऑपरेशन चलाने की बात कही थी. उनका कहना था कि उनका मकसद हमास को खत्म करना है. उनका दावा है कि रफाह शहर में हमास की चार बटालियन हैं.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.









