छोटी उम्र-बड़े इरादे: लॉकडाउन में 'टीचर' बनीं छोटी-छोटी ये चार बच्चियां, ऐसे कर रहीं मदद
AajTak
अपने इलाके में शिक्षा की अलख जगाए रखने के सोच को लेकर अकेले चली दीपिका के साथ लगातार बच्चे जुड़ते गए और कारवां बनता गया. अब चार लड़कियां पढ़ाने में और 100 बच्चे इस अभियान से जुड़ गए हैं.
खूंटी के लोधमा में 4 लड़कियों ने लॉकडाउन और लगातार स्कूल बंद होने से चौपट होती बच्चों की पढ़ाई के लिए नई पहल की है. यहां 7वीं में पढ़ने वाली दीपिका ने छोटे बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखने के लिए उन्हें फ्री पढ़ाना शुरू किया. जल्द ही दीपिका के प्रयास से प्रेरणा लेकर सीनियर क्लास की तीन लड़कियों ने भी दीपिका समेत 7वीं और उसके ऊपर के बच्चों के लिए मुफ्त क्लास का आयोजन शुरू कर दिया. पढ़ें- छोटी-छोटी बच्चियों के बड़े-बड़े इरादों के बारे में... यह कहानी है झारखंड के खूंटी के लोधमा में स्थित चांद पाड़ा गांव की. यहां का सरकारी स्कूल लॉकडाउन की वजह से 2020 मार्च के बाद से बंद पड़ा है. हालांकि उसके ठीक बगल में इस छोटी सी लाइब्रेरी को ग्राम पंचायत ने दीपिका, लिली और उनके दो दोस्तों के हवाले उनकी पहल और सोच से खुश होकर कर दी है. अब सरकारी स्कूल की तरह यहां पढ़ाई हो रही है और बच्चे कभी rhyming वर्ड तो कभी कविता का पाठ करते हैं तो कभी प्रार्थना करते हुए खुश दिख रहे हैं. इसी सरकारी स्कूल की 7वीं की छात्रा दीपिका इनकी खुशी की वजह बनीं. बता दें कि जब बच्चों का स्कूल जाना बंद हुआ तो वो खुद भी अपने पाठ भूलने लगी थी तो उन्हें लगा कि जब वे भूल रही हैं तो स्कूल बंद होने के बाद सिर्फ खेलने में मन लगा रहे गांव के बच्चों का तो बुरा हाल होगा. यह सोचकर उन्होंने लाइब्रेरी वाली जगह की मांग की और बच्चों को फ्री पढ़ाने के प्रस्ताव के साथ ग्राम पंचायत से मिलीं. दीपिका की सोच से प्रभावित पंचायत ने तुरंत हामी भर दी. उसके बाद पहले 25 बच्चे जुड़े.More Related News

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












