
चाय बागान की फैक्ट्री में लगी भीषण आग, सिलीगुड़ी के नक्सलबाड़ी की घटना
AajTak
पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में एक चाय बागान की फैक्ट्री में रविवार की रात आग लग गई. आग की सूचना पाकर फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं और आग बुझाने की कोशिशें शुरू कर दीं. घटना सिलीगुड़ी के नक्सलबाड़ी क्षेत्र में स्थित कंचनजंघा चाय बागान की है.
पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में रविवार की रात एक चाय बागान की फैक्ट्री में आग लग गई. चाय बागान की फैक्ट्री में आग लगने की सूचना पाकर फायर ब्रिगेड एक्टिव मोड में आ गया. फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं. फायर ब्रिगेड ने घंटों मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया है. घटना सिलीगुड़ी के नक्सलबाड़ी की है.
जानकारी के मुताबिक सिलीगुड़ी के नक्सलबाड़ी इलाके में कंचनजंघा चाय बागान है. कंचनजंघा चाय बागान की फैक्ट्री में रविवार की रात करीब 8 बजे कर्मचारियों को चिंगारी उठती नजर आई. चाय बागान की फैक्ट्री से निकलती दिखी चिंगारी ने देखते ही देखते लपटों का रूप ले लिया. आग के विकराल रूप धारण करने के बाद चाय बागान के मजदूरों ने इसकी जानकारी फायर ब्रिगेड को दी.
चाय बागान के मजदूरों ने फायर ब्रिगेड को सूचना देने के साथ ही अपने स्तर से भी आग पर काबू पाने की कोशिशें शुरू कर दीं. कंचनजंघा चाय बागान की फैक्ट्री में आग लगने की सूचना पाकर फायर ब्रिगेड ने भी माटीगाड़ा स्टेशन से दमकल की दो गाड़ियां मौके के लिए रवाना कर दीं. मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियों ने भी आग बुझाने की कोशिशें शुरू कर दीं.
फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया. आग कैसे लगी, इस संबंध में कोई कारण अभी पता नहीं चल सका है. फायर ब्रिगेड के मुताबिक अनुमान है कि आग शार्ट सर्किट की वजह से लगी होगी. फायर ब्रिगेड ने चाय बागान की फैक्ट्री में आग लगने के असली कारण का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है.
गौरतलब है कि नॉर्थ ईस्ट का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले सिलीगुड़ी के नक्सलबाड़ी इलाके में कंचनजंघा चाय बागान स्थित है. ये क्षेत्र दार्जिलिंग जिले में आता है. पश्चिम बंगाल का दार्जिलिंग जिला चाय उत्पादन के लिए पूरे देश में अलग पहचान रखता है. इलाके में कई चाय बागान हैं.
(रिपोर्ट- जयदीप बाग)

ईरान का 'हिमालय'... जिसकी सरहदों को नहीं पार कर सका है कोई शत्रु, क्या खामेनेई की सेना को यही बचाएगा
ईरान का ऊबड़-खाबड़ इलाका, विशाल आकार और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था किसी भी जमीनी हमले के लिए बहुत बड़ी रुकावटें पैदा करती हैं, ईरान-इराक युद्ध जैसे ऐतिहासिक उदाहरण इन चुनौतियों को उजागर करते हैं, जहां हमलावर सेनाएं पहाड़ों और रेगिस्तानों के बीच फंस गईं थी. अमेरिका भी ईरान के परमाणु केंद्रों पर हमला कर चुका है, लेकिन पूरी सफलता उसे भी नहीं मिली,

जम्मू-कश्मीर के पूंछ और सांबा जिलों में भारत-पाक सीमा पर पाकिस्तानी ड्रोन देखे जाने से सुरक्षा एजेंसियों अलर्ट मोड पर हैं. LoC और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास ड्रोन मंडराने के बाद सुरक्षा बलों ने एंटी-ड्रोन सिस्टम सक्रिय कर दिया. इससे पहले राजौरी में भी संदिग्ध ड्रोन देखे गए थे, जिन्हें रोकने के लिए सेना ने फायरिंग की थी.











