
'गौतम गंभीर पर बहुत प्रेशर...', टेम्बा बावुमा ने टीम इंडिया के हेड कोच पर दिया बड़ा बयान, BCCI को चेताया
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टेम्बा बावुमा का मानना है कि भारत टेस्ट क्रिकेट में ट्रांजिशन फेज से गुजर रहा है, जबकि व्हाइट-बॉल में वह बेहद मजबूत है. बावुमा ने कहा अलग कोच समाधान नहीं है और BCCI को गौतम गंभीर को लंबा समय देना चाहिए.
भारत के खिलाफ दिसंबर में वनडे और टी20 सीरीज हारने के बाद साउथ अफ्रीका के टेस्ट कप्तान टेम्बा बावुमा ने भारतीय क्रिकेट की मौजूदा स्थिति पर खुलकर बात की है. बावुमा का मानना है कि व्हाइट-बॉल क्रिकेट में भारत पूरी तरह अलग टीम नजर आता है, जबकि टेस्ट क्रिकेट में यह टीम एक क्लियर ट्रांजिशन फेज से गुजर रही है. इस दौरान वो टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर का सपोर्ट करते दिखे वहीं उन्होंने BCCI को सलाह कम वॉर्निंंग भी दी है.
बावुमा ने कहा कि वनडे और टी20 में विराट कोहली और रोहित शर्मा की मौजूदगी भारत को मजबूती देती है, लेकिन टेस्ट में इन दोनों की अनुपस्थिति ने टीम की कमजोरी उजागर की. उन्होंने 2019 की साउथ अफ्रीकी टेस्ट टीम से तुलना करते हुए कहा कि बड़े खिलाड़ियों के जाने के बाद ऐसा दौर हर टीम को झेलना पड़ता है और इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है.यह भी पढ़ें: 5 फुट, 4 इंच… लेकिन कद से बड़ी हिम्मत, टेम्बा बावुमा कैसे बने क्रिकेट के बाहुबली
भारत के हेड कोच गौतम गंभीर पर बढ़ते प्रेशर को लेकर बावुमा ने कहा कि उन्हें हालात को स्वीकार करते हुए आगे बढ़ना होगा. उनके मुताबिक व्हाइट-बॉल क्रिकेट में भारत के शानदार संसाधन और घरेलू परिस्थितियों में होने वाला 2026 टी20 वर्ल्ड कप गंभीर को समय दिला सकता है. वनडे में कोहली और रोहित की जिम्मेदारी भी कोच के लिए राहत का कारण बनेगी.
टेम्बा बावुमा ने क्रिकइंफो में लिखे कॉलम में कहा- अलग टेस्ट और व्हाइट-बॉल कोच की बहस पर बावुमा ने साफ कहा कि यह मॉडल खिलाड़ियों को भ्रमित करता है. उन्होंने बताया कि साउथ अफ्रीका ने 2023 में यह प्रयोग किया था, लेकिन अब एक ही कोच सभी फॉर्मेट के लिए ज्यादा बेहतर है. बावुमा के अनुसार, गंभीर का BCCI संग कॉन्ट्रैक्ट 2027 वनडे वर्ल्ड कप तक है और BCCI को उन्हें लंबी अवधि की सोच के साथ सपोर्ट करना चाहिए.यह भी पढ़ें: कोटा प्लेयर का टैग, बॉडी शेमिंग... टेम्बा बावुमा की कहानी जिन्होंने साउथ अफ्रीका का क्रिकेट इतिहास बदल दिया
बावुमा ने यह भी माना कि पहले टेस्ट में कप्तान शुभमन गिल की चोट भारत के लिए बड़ा झटका थी. उनकी गैरमौजूदगी में भारत को अस्थायी कप्तान (ऋषभ पंत) और नया नंबर-4 बल्लेबाज उतारना पड़ा, जिसका साउथ अफ्रीका ने पूरा फायदा उठाया.
उन्होंने अंत में इस कहा कि ट्रांजिशन के दौर में टीम को शांत रहना चाहिए, सीनियर खिलाड़ियों को जिम्मेदारी उठानी होगी और युवा खिलाड़ियों को खुद को साबित करने का मौका मिलेगा. यह दौर कठिन जरूर है, लेकिन यही भविष्य की नींव भी रखता है. 2026 में भारत को सिर्फ पांच टेस्ट खेलने हैं, जिनमें से दो न्यूजीलैंड में हैं, जहां भारत ने आखिरी टेस्ट सीरीज 2009-10 में जीती थी.

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