
खून, साज़िश और सौदा... साथ रहकर भी जम्मू और कश्मीर के बीच क्यों है अलगाव वाला रिश्ता
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जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक परिदृश्य में नया विवाद उभर रहा है जहां पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन ने जम्मू और कश्मीर के बीच अलगाव की मांग की है.
हिमालय के ऊपरी सिरे की चट्टानी और बर्फ से ढकी जमीन एक बार फिर कांप रही है. जम्मू और कश्मीर के साथ फिर से नया सवाल सिर उठा रहा है. मसला ये है कि जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन ने कहा 'अब समय आ गया है कि जम्मू और कश्मीर के बीच अब अलगाव हो जाए और ये सौहार्द के साथ हो. उन्होंने कहा कि, अब 'कश्मीर और जम्मू के बीच प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर फिर से सोचने का समय आ गया है.'
जम्मू में उठती रही है अलग राज्य की मांग जम्मू में अलग राज्य की मांग समय-समय पर उठती रही है, लेकिन घाटी से आने वाले किसी बड़े नेता द्वारा पहली बार यह कहा गया है कि इस हिमालयी क्षेत्र के ये दो हिस्से शायद अलग-अलग रहकर बेहतर भविष्य गढ़ सकते हैं, लेकिन आज यह रिश्ता इतना तनावपूर्ण क्यों है, इसे समझने के लिए हमें उस दौर में लौटना होगा, जब यह गठबंधन बना था, यूं समझिए कि ये ऐसी शादी थी, जो जनता की इच्छा पर नहीं, बल्कि एक बिक्री रसीद पर आधारित था.
आज जम्मू और कश्मीर को इतिहास के जुड़े हुए जुड़वां की तरह माना जाता है कि दोनों अलग-अलग हैं ही नहीं, लेकिन आज़ादी से महज़ एक सदी पहले तक ये दोनों बिल्कुल अलग इकाइयां थीं. उन्हें जोड़ कर रखते थे तो सिर्फ दुर्गम पहाड़ी रास्ते और कुछ महत्वाकांक्षी लोगों की राजनीतिक चालें. विडंबना है कि उनका यह मेल एक ढहते साम्राज्य और एक हताश महारानी और उसके वज़ीर के बीच हुए “अवैध” सत्ता खेल का नतीजा था.
तो कहानी कुछ यूं है कि...
जून 1839 में जब पंजाब के शेर, महाराजा रणजीत सिंह का निधन हुआ, तो वे अपने पीछे एक ऐसा साम्राज्य छोड़ गए जो खैबर दर्रे से सतलुज नदी तक, कश्मीर की पहाड़ियों से मुल्तान के रेगिस्तान तक फैला था. लेकिन इस वैभवशाली और बड़े राज्य के साथ अराजकता भी विरासत में मिली. महज चार वर्षों के भीतर तीन महाराज, खड़क सिंह, नौनिहाल सिंह, शेर सिंह और एक रीजेंट की हत्या कर दी गई. सिंहासन खून से सना हुआ था. कभी शक्तिशाली रहा सिख साम्राज्य अब षड्यंत्रों का अखाड़ा बन चुका था.
इस उथल-पुथल के केंद्र में दो विवादास्पद किरदार थे, महारानी जिन्दन कौर, रणजीत सिंह की सबसे छोटी रानी जो बालक महाराजा दलीप सिंह की मां थीं और उनके वज़ीर (प्रधानमंत्री) लाल सिंह, जिन्हें दबी जुबान में उनका प्रेमी भी कहा जाता है. हालांकि यह कभी स्पष्ट तौर नहीं रहा.

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