
खालिस्तानी आतंकी पन्नू मर्डर केस: अमेरिकी अटॉर्नी जनरल बोले- निखिल गुप्ता पर चलेगा केस, जानें कितनी हो सकती है सजा
AajTak
53 वर्षीय निखिल गुप्ता, जिन्हें निक के नाम से भी जाना जाता है, को न्यूयॉर्क में खालिस्तानी अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश में शामिल होने के आरोप में अमेरिकी सरकार के अनुरोध पर 30 जून, 2023 को चेक गणराज्य में गिरफ्तार किया गया था. उन्हें 14 जून को अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया था. गुप्ता को सोमवार को न्यूयॉर्क में एक संघीय अदालत में पेश किया गया.
खालिस्तान समर्थक गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या साजिश रचने के मामले में आरोपी भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता को अमेरिका की कोर्ट का सामना करना पड़ेगा. अमेरिकी अटॉर्नी जनरल ने मेरिक गारलैंड ने कहा कि न्यूयॉर्क में एक सिख चरमपंथी के खिलाफ हत्या की साजिश में शामिल होने के आरोपी भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता को अब अमेरिकी कोर्टरूम में न्याय का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने नागरिकों को चुप करने या नुकसान पहुंचाने के प्रयासों को बर्दाश्त नहीं करेगा.
दरअसल, 53 वर्षीय निखिल गुप्ता, जिन्हें निक के नाम से भी जाना जाता है, को न्यूयॉर्क में खालिस्तानी अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश में शामिल होने के आरोप में अमेरिकी सरकार के अनुरोध पर 30 जून, 2023 को चेक गणराज्य में गिरफ्तार किया गया था. उन्हें 14 जून को अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया था.
गुप्ता को सोमवार को न्यूयॉर्क में एक संघीय अदालत में पेश किया गया, जहां उनके वकील जेफरी चैब्रो के अनुसार उन्होंने खुद को निर्दोष बताया. उन्हें सोमवार को अमेरिकी मजिस्ट्रेट न्यायाधीश जेम्स एल. कॉट के समक्ष सुपरसीडिंग अभियोग में आरोपों पर अभियोग लगाया गया. यह मामला अमेरिकी जिला न्यायाधीश विक्टर मारेरो को सौंपा गया है.
गारलैंड ने सोमवार को कहा, "यह प्रत्यर्पण स्पष्ट करता है कि न्याय विभाग अमेरिकी नागरिकों को चुप कराने या उन्हें नुकसान पहुंचाने के प्रयासों को बर्दाश्त नहीं करेगा. निखिल गुप्ता को अब एक अमेरिकी अदालत में न्याय का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि वह भारत में सिख अलगाववादी आंदोलन का समर्थन करने वाले एक अमेरिकी नागरिक को निशाना बनाने और उसकी हत्या करने की कथित साजिश में शामिल है."
न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले के अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, "निखिल गुप्ता पर सुपारी देकर करने का आरोप लगाया गया है, जिसके लिए अधिकतम 10 साल की जेल की सजा हो सकती है. वहीं भाड़े पर हत्या करने की साजिश रचने का आरोप भी लगाया गया है, जिसके लिए अधिकतम 10 साल की जेल की सजा हो सकती है."
डिप्टी अटॉर्नी जनरल लिसा मोनाको ने कहा कि न्यूयॉर्क शहर में एक अमेरिकी नागरिक की हत्या करने के लिए कथित तौर पर एक भारतीय सरकारी कर्मचारी द्वारा रची गई यह हत्या की साजिश, एक राजनीतिक कार्यकर्ता को एक सर्वोत्कृष्ट अमेरिकी अधिकार - उसकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रयोग करने के लिए चुप कराने का एक बेशर्म प्रयास है. आरोपी का प्रत्यर्पण न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

अमेरिका की 250वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ पर जारी होने वाले विशेष सोने के सिक्के को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. प्रस्तावित सिक्के पर डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीर छापने के फैसले ने कानूनी और राजनीतिक बहस छेड़ दी है. जहां ट्रंप समर्थक इसे राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बता रहे हैं, वहीं विरोधी इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बता रहे हैं.

जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने रविवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बिछी बारूदी सुरंगों को हटाने का प्रस्ताव रखा है. उन्होंने कहा है कि यदि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच सीजफायर हो जाता है तो जापान होर्मुज जलडमरूमध्य में बिछी समुद्री बारूदी सुरंगों (नेवल माइंस) को हटाने के लिए अपने अत्याधुनिक 'माइनस्वीपर' जहाज तैनात करेगा.

ईरान जंग से तेल $112 प्रति बैरल तक पहुंच रहा है. एयरलाइंस उड़ानें काट रही हैं. ट्रांसपोर्ट महंगा हो रहा है. जापान, दक्षिण कोरिया, बांग्लादेश में फ्यूल राशनिंग शुरू हो गई है. IEA का 10-पॉइंट प्लान आ गया है. दुनियाभर की सरकारें इसे एनर्जी सिक्योरिटी कहेंगी, लेकिन असर लॉकडाउन जैसा दिखना शुरू हो चुका है. इस बार चेतावनी भी नहीं मिलेगी.

जापान ने कहा है कि अगर इजरयाल-अमेरिका का ईरान के साथ जो युद्ध जल रहा है, उसपर अगर पूरी तरह से विराम लगता है तो वह होर्मुज के रास्ते से माइंस हटाने का सोचेगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो दिन पहले ही जापान के प्रधानमंत्री से मुलाक़ात की थी. इस मुलाक़ात के बाद जापान की ओर से यह बयान जारी किया गया है.

ईरान ने दक्षिण इजरायल के अराद और डिमोना में भीषण मिसाइल हमले किए है. इजरायली विदेश मंत्रालय के मुताबिक इस हमले में बच्चों समेत 100 से ज्यादा लोग घायल है. ईरान ने इन हमलों के लिए बैलिस्टिक मिसािलों का इस्तेमाल किया और डिमोनो शहर जहां इजरायल का सबसे बड़ा परमाणु संयंत्र के पास ये हमला हुआ, जो कि बड़ा चिंता का विषय है.








