
कर्नाटक में आरक्षण पर खुले मोर्चे, मुस्लिमों के बाद दलित रिजर्वेशन में बदलाव पर बवाल
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कर्नाटक में मुस्लिमों को चार फीसदी आरक्षण को खत्म करने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि दलित समुदाय के आरक्षण को आंतरिक स्तर पर चार हिस्सों में बांटने की सिफारिश गले की फांस बनती जा रही है. राज्य की बोम्मई सरकार के खिलाफ दलितों में शामिल बंजारा समुदाय सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रहा है. इस विरोध प्रदर्शन का नुकसान भाजपा को हो सकता है.
कर्नाटक विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के बीच आरक्षण को लेकर कई मोर्चे खुल गए हैं. मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई एक के बाद एक फैसला आरक्षण से जुड़े मामलों में ले रहे हैं. मुस्लिमों को चार फीसदी आरक्षण को खत्म करने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि दलित समुदाय के आरक्षण को आंतरिक स्तर पर चार हिस्सों में बांटने की सिफारिश गले की फांस बनती जा रही है.
बोम्मई सरकार के खिलाफ दलितों में शामिल बंजारा समुदाय सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं. बीजेपी के झंडे जला रहे हैं, तो पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के घर पर प्रदर्शनकारियों ने पथराव तक किए हैं. राज्य में विधानसभा के चुनाव से ठीक पहले बंजारा समुदाय की नाराजगी बीजेपी के लिए कहीं महंगी न पड़ जाए, क्योंकि दलितों की आबादी कर्नाटक में 20 फीसदी के करीब है, जो किसी भी दल का खेल बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखते हैं. कर्नाटक में दलित समुदाय की आबादी भले ही 20 फीसदी के करीब है, लेकिन उन्हें अभी तक राज्य में 15 फीसदी आरक्षण मिल रहा था. बीजेपी ने पिछले साल दलितों के आरक्षण को 15 फीसदी से बढ़ाकर 17 फीसदी कर दिया है. सरकार के इस फैसले से दलित खुश थे, लेकिन 24 मार्च को दलितों के आरक्षण को आंतरिक स्तर पर चार हिस्सों में बांट दिया है. सरकार के इस फैसले के खिलाफ बंजारा समुदाय सड़क पर उतर आया है.
दरअसल, कर्नाटक सरकार ने यह फैसला न्यायमूर्ति ए जे सदाशिव आयोग की रिपोर्ट के आधार पर किया है. दलित समुदाय को मिल रहे 17 प्रतिशत आरक्षण को आंतरिक रूप से बांटा गया. इस फैसले के तहत 6 प्रतिशत शेड्यूल कास्ट (लेफ्ट) के लिए, 5.5 प्रतिशत शेड्यूल कास्ट (राइट), 4.5 प्रतिशत ठचेबल्स के लिए और बाकी बचा एक प्रतिशत बाकियों के लिए रखा जाए.
बंजारा समुदाय क्यों नाराज?
बंजारा समुदाय को लोग बोम्मई सरकार के अनुसूचित जाति के आरक्षण पर लिए गए फैसले का विरोध कर रहे हैं. बंजारा, गोवी, कोरमा और कोर्चा सभी एससी ठचेबल्स के अंतर्गत रखा है, जिसके लिए 4.5 फीसदी कोटा है. बंजारा समुदाय एससी आरक्षण का सबसे बड़ा लाभार्थी है. पहले की आरक्षण प्रणाली में उन्हें 10 फीसदी तक लाभ मिल रहा था, लेकिन आरक्षण के आंतरिक बंटवारे के बाद उन्हें 4.5 फीसदी पर तय किया गया है जो उन्हें कम और अवैज्ञानिक लगता है. इसीलिए बीजेपी के खिलाफ सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं.
कर्नाटक में जस्टिस एजे सदाशिवा कमीशन 2005 में कांग्रेस-जनता दल (सेक्यूलर) की सरकार के दौरान गठित की गई थी. इस कमीशन को कर्नाटक में दलित जाति को मिलने वाले आरक्षण को उपवर्गीकृत करने की जरूरत को देखते हुए गठित किया गया था.

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