
एक थी महालक्ष्मी! फ्रिज में लाश के टुकड़े, पेड़ पर लटका कातिल और कागज के एक पुर्जे में दर्ज 'कुबूलनामा'
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31 साल का मुक्ति रंजन रॉय ओड़िशा के भद्रक जिले का रहने वाला था. लेकिन नौकरी बेंगलुरु में किया करता था. बेंगलुरु के जिस मॉल में मुक्ति काम किया करता था उसी मॉल में महालक्ष्मी भी काम किया करती थी. वहीं दोनों की मुलाकात हुई और फिर दोस्ती.. और फिर प्यार.
Mahalakshmi Murder Case: बेंगलुरु के एक घर में रखे फ्रिज से जो कहानी 21 सितंबर को शुरु हुई थी, वो 25 सितंबर की सुबह ओड़िशा के भद्रक जिले के एक गांव में पेड़ पर लटकी लाश के साथ खत्म हो गई. जी हां, बेंगलुरु में रहने वाली 29 साल की महालक्ष्मी का कातिल मिल तो गया लेकिन मुर्दा. क्योंकि उसने पुलिस के आने से पहले ही एक पेड़ से लटककर खुदकुशी कर ली थी. लेकिन खुदकुशी से पहले न सिर्फ उसने महालक्ष्मी के कत्ल की बात कबूली बल्कि वो कत्ल की वजह भी बता गया. जिसका राज उसका डायरी में दफ्न था.
महालक्ष्मी के साथ ही काम करता था मुक्ति रंजन रॉय 31 साल का मुक्ति रंजन रॉय ओड़िशा के भद्रक जिले का रहने वाला था. लेकिन नौकरी बेंगलुरु में किया करता था. बेंगलुरु के जिस मॉल में मुक्ति काम किया करता था उसी मॉल में महालक्ष्मी भी काम किया करती थी. वहीं दोनों की मुलाकात हुई और फिर दोस्ती. और फिर प्यार. और यही प्यार महालक्ष्मी की जान ले गया. इस दिल दहला देने वाली वारदात की पूरी कहानी जानन से पहले, आइए आपको बताते हैं कि खुदकुशी से पहले मुक्ति रंजन रॉय ने अपने सुसाइड नोट में क्या लिखा था-
मैंने अपनी प्रेमिका महालक्ष्मी को 3 सितंबर को मार डाला. मैं उसके बर्ताव से ऊब चूका था. कुछ पर्सनल मैटर पर हम दोनों के बीच झगड़ा हुआ और इसी झगड़े के दौरान मैंने उसे मार डाला. कत्ल के बाद लाश को ठिकाने लगाने के लिए मैंने उसके टुकड़े किए थे.
पुलिस तक पहुंची था महालक्ष्मी और मुक्ति का झगड़ा इस सुसाइड नोट से साफ है कि मुक्ति रंजन और महालक्ष्मी रिलेशनशिप में थे लेकिन महालक्ष्मी कुछ और लोगों के भी करीब थी और यही बात दोनों के बीच झगड़े की वजह बनी. यहां तक कि दोनों की लड़ाई पुलिस तक भी पहुंच गई थी. और पुलिस से चंगुल से छूटने के लिए 10 हजार रुपये की रिश्वत देनी पड़ी. मुक्ति ने सुसाइड नोट में लिखा है कि पहले महालक्ष्मी ने उसे मारने की कोशिश की थी, लेकिन गुस्से में उसी ने महालक्ष्मी का क़त्ल कर दिया और मुक्ति के लाए हुए चाकू से ही उसकी लाश के टुकड़े कर डाले. एक खास बात ये भी है कि मुक्ति ने ये सुसाइड नोट क़त्ल के दस रोज़ बाद यानी 13 सितंबर को लिख लिया था. लेकिन उसने खुदकुशी 25 सितंबर को की.
महालक्ष्मी की CDR में मिला था मुक्ति रंजन का नंबर अब आइए आपको बताते हैं कि आखिर मुक्ति रंजन राय का सुराग बेंगलुरु पुलिस को कैसे मिला. 21 सितंबर को जब महालक्ष्मी की टुकड़ों में बंटी लाश फ्रिज से बरामद हुई तब पुलिस को महालक्ष्मी का एक फोन भी मिला था. ये फोन 3 सितंबर से स्विच ऑफ था. महालक्ष्मी के कॉल डिटेल रिकॉर्ड से पहली बार मुक्ति रंजन रॉय का नंबर मिला.
महालक्ष्मी के साथ ही गायब हो गया था मुक्ति रंजन उधर, जब पुलिस ने मॉल के उस शॉप में जब पूछताछ की जहां महालक्ष्मी काम किया करती थी तो पता चला महालक्ष्मी आखिरी बार वहां 1 सितंबर को गई थी. उसी शॉप के बाकी मुलाजिमों से जब पूछताछ की गई तो पता चला कि एक और मुलाजिम भी गायब है. वो भी उसी 1 सितंबर से जब से महालक्ष्मी गायब थी. वो मुलाजिम मुक्ति रंजन रॉय था. अब पुलिस ने जब मुक्ति रंजन के कॉल डिटेल रिकॉर्ड को खंगालना शुरु किया. तो पता चला कि 2 और 3 सितंबर को उसके मोबाइल का लोकेशन महालक्ष्मी के घर के आसपास ही थी. यहीं से पुलिस को मुक्ति पर शक हुआ.

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