
ईरान के शीर्ष नेताओं की मौत के बाद देश की कमान किसके हाथ में?
BBC
अमेरिकी और इसराइली हमलों में ईरान के कई शीर्ष नेता मारे जा चुके हैं. इसके बावजूद ईरान खाड़ी के देशों को निशाना बना रहा है. देश की सत्ता की चाबी किसके हाथ में है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई दफ़ा कह चुके हैं वे ईरान से बातचीत कर रहे हैं. उन्होंने इस बात का ज़िक्र तो नहीं किया कि उनकी बातचीत किससे हो रही है, लेकिन इतना ज़रूर कहा 'सही लोगों' से वार्ता कर रहे हैं.
इसके बाद विदेशी मीडिया ने बताया कि ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बग़र ग़लीबाफ़ ही वह शख़्स हैं, जिनसे वॉशिंगटन बातचीत कर रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की मौत के बाद ईरान को असल में कौन चला रहा है?
दरअसल, ट्रंप के लिए वेनेज़ुएला ऐसा मॉडल बन गया था, जिसके प्रमुख को हटाते ही सारी व्यवस्था धाराशायी हो गई. लेकिन ईरान ऐसे देशों से अलग है.
यहां किसी एक व्यक्ति के जाने से उलटफेर या बड़े बदलाव नहीं होते. ईरान के विशेषज्ञों का कहना है कि देश की व्यवस्था कुछ इसी तरह बनाई गई है कि ऐसे झटकों को झेला जा सकता है.
ईरान में अब जो सिस्टम प्रभावी है, वह सैन्य रुझान रखता है और ख़ास पारदर्शी नहीं है. ताक़त अब एक छोटे समूह में सिमटी हुई दिखती है, इसमें धार्मिक नेता, राजनीतिक लोग और इस्लामिक गार्ड कोर (आईआरजीसी) के वरिष्ठ कमांडर शामिल हैं.
इनमें आईआरजीसी सबसे अहम है.













