
ईरानी धमकी के बीच US ने सऊदी से हटाया ये बैन, अब हो सकेगी हथियारों की सप्लाई
AajTak
अमेरिका ने सऊदी अरब पर लगा एक बड़ा प्रतिबंध हटा दिया है. हमास नेता इस्माइल हानिया की मौत के बाद ईरान ने इजरायल को बदले की धमकी दी है. अमेरिका अरब देशों को एकजुट कर गाजा युद्ध सुलझाने की कोशिश में लगा हुआ है. इसी बीच अमेरिका ने सऊदी से यह प्रतिबंध हटाया है.
अमेरिका ने सऊदी अरब पर लगाया बड़ा प्रतिबंध हटा लिया है. सोमवार को अमेरिका ने पुष्टि की कि वो सऊदी अरब को आक्रामक हथियारों की बिक्री फिर से शुरू करेगा. यमन के साथ चल रहे सऊदी अरब के युद्ध में मानवाधिकारों पर चिंता जताते हुए अमेरिका ने यह प्रतिबंध लगाया था. हालांकि, अब अमेरिका ने गाजा युद्ध को सुलझाने में सऊदी की भूमिका को देखते हुए उसे बड़ी राहत दी है.
तीन साल पहले यमन में सऊदी हमलों को देखते हुए अमेरिका ने मानवाधिकारों का हवाला देकर उसे आक्रामक हथियारों की बिक्री रोक दी थी. अब प्रतिबंध हटाने के बाद अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि अमेरिका सऊदी अरब को आक्रामक हथियारों की बिक्री वाले समझौते पर दोबारा लौट आएगा.
विदेश विभाग के प्रवक्ता वेदांत पटेल ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'सऊदी अरब अमेरिका का करीबी रणनीतिक साझेदार बना हुआ है और हम उस साझेदारी को बढ़ाने के लिए तत्पर हैं.'
जो बाइडेन प्रशासन और सऊदी के खट्टे-मीठे रिश्ते
साल 2021 में जो बाइडेन ने अमेरिकी राष्ट्रपति का पद संभालते ही मानवाधिकार रिकॉर्ड को लेकर सऊदी को घेरना शुरू कर दिया था. उन्होंने पद संभालने के तुरंत बाद घोषणा की थी कि अमेरिका के पुराने हथियार ग्राहक सऊदी को अब केवल रक्षात्मक हथियार दिए जाएंगे.
बाइडेन ने यह कदन तब उठाया था जब ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों, जिनका यमन के अधिकांश हिस्सों पर कब्जा है, के खिलाफ सऊदी नेतृत्व वाले हवाई हमलों में बच्चों सहित हजारों नागरिकों के मारे जाने का अनुमान लगाया गया था.

इजरायल की Haifa Refinery पर हुए ईरानी हमले में अहम बाहरी इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा है. हमला रिफाइनरी से जुड़े एक थर्ड-पार्टी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुआ, जो ऑपरेशन के लिए जरूरी था. कंपनी के मुताबिक, कुछ दिनों में फिर से पूरी तरह संचालन शुरू होने की उम्मीद है. ज्यादातर प्रोडक्शन यूनिट्स फिलहाल चालू हैं. देखें वीडियो.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही मीडिया के सामने सेना भेजने की बात से इनकार किया हो, लेकिन 2,200 मरीन सैनिकों के साथ यूएसएस त्रिपोली युद्धपोत का मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ना कुछ और ही इशारा कर रहा है. ट्रंप का मुख्य मकसद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के तेल मार्ग को ईरान के कब्जे से छुड़ाना और वहां दबे यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करना है. अगर ये सेना तैनात होती है, तो यह पिछले दो दशकों में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य कदम होगा.

महायुद्ध तीसरे हफ्ते में पहुंच गया है...लेकिन बम-बारूद-गोले थम ही नहीं रहे ..। कहां तो युद्ध ईरान को न्यूक्लियर पावर बनने से रोकने के लिए शुरू हुआ...और कहां ये जंग तेल युद्ध बनकर दुनिया को धधका रहा है...। समझ नहीं आ रहा कि ये जंग किसे धुरंधर बना रहा...एक तरफ तबाही है...तो दूसरी तरफ तेल-गैस-हीलियम संकट...जो हर घर...हर परिवार पर असर डाल रहा है..

अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध में अब तेल-गैस के ठिकानों पर हमले से तनाव बढ़ गया है. पूरे दुनिया पर ऊर्जा का संकट बढ़ता जा रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से तेल के बाजार में पहले ही उथल-पुथल मची है. अब दोनों ओर से ताजा हमलों से पूरी दुनिया महंगाई के बड़े संकट की ओर बढ़ती जा रही है. देखें लंच ब्रेक.

चाहे हालात शांति के हों या युद्ध जैसे तनावपूर्ण, जिंदगी कभी नहीं रुकती, इसकी मिसाल लेबनान में देखने को मिली. मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच यहां दुनिया के अलग-अलग देशों से आए हजारों लोग, जो काम के सिलसिले में लेबनान में रह रहे हैं, उन्होंने इजरायली हमलों और तमाम चुनौतियों के बावजूद ईद-उल-फितर का त्योहार पूरे उत्साह के साथ मनाया. संघर्ष और अनिश्चितता के बीच भी लोगों ने एक-दूसरे के साथ खुशियां साझा कीं.

होर्मुज को लेकर तनातनी जारी है. इस बीच छह देशों ने एक बयान जारी किया है ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और नीदरलैंड्स ने कहा है कि वे हॉर्मुज़ में सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए अपना योगदान देने के लिए तैयार हैं. हालांकि, इटली, जर्मनी और फ्रांस ने बाद में स्पष्ट किया कि वे तत्काल किसी सैन्य सहायता की बात नहीं कर रहे हैं. इन देशों ने क्या शर्त रखी है. जानें.







