
'इजरायल ने पलटवार किया तो हमारा एक्शन काफी खतरनाक होगा', ईरान की नेतन्याहू को दो टूक
AajTak
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नासिर कनानी ने कहा कि अपने राष्ट्रीय हितों के लिए हमने स्वाभाविक रूप से इस कार्रवाई (इजरायल पर हमला) को अंजाम दिया और अगर कोई अन्य कार्रवाई (इजरायल द्वारा) की जाती है, तो हमारी कार्रवाई निश्चित रूप से और भी ज्यादा खतरनाक होगी.
इजरायल पर ड्रोन और मिसाइल अटैक के बाद ईरान ने कहा कि अगर सुरक्षा परिषद और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की ओर से कोई जिम्मेदार कार्रवाई की गई होती, तो हम इतना साहसिक कदम नहीं उठाते. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नासिर कनानी ने कहा कि इजरायल द्वारा ईरान के राजनयिक ठिकानों के खिलाफ अपराध को अंजाम देने में अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन किया गया है. इसलिए ईरान ने राजनयिक तरीकों को देखने के बाद अपनी ज़िम्मेदारी निभाई है.
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नासिर कनानी ने कहा कि अपने राष्ट्रीय हितों के लिए हमने स्वाभाविक रूप से इस कार्रवाई (इजरायल पर हमला) को अंजाम दिया और अगर कोई अन्य कार्रवाई (इजरायल द्वारा) की जाती है, तो हमारी कार्रवाई निश्चित रूप से और भी ज्यादा खतरनाक होगी.
यूरोपीय देशों पर साधा निशाना
हमले की निंदा करने वाले यूरोपीय देशों का जिक्र करते हुए कनानी ने कहा कि हमारी सलाह है कि इजरायली शासन के सभी समर्थकों को ईरान के बारे में अनुचित शब्दों का चयन करने के बजाय ईरान की जिम्मेदार और संतुलित कार्रवाई की सराहना करनी चाहिए.
'हमले से पहले किसी भी देश से समझौता नहीं किया'
नासिर कनानी ने को कहा कि इज़राइल के खिलाफ ईरान के जवाबी हमले से पहले किसी भी देश के साथ कोई पूर्व-निर्धारित समझौता नहीं किया गया था. ईरान ने शनिवार (13 अप्रैल) देर रात इजरायली क्षेत्र पर अपने पहले सीधे हमले में मिसाइलों और विस्फोटक ड्रोनों की बौछार की, यह एक जवाबी हमला था जिसे तेहरान ने सीरिया की राजधानी में अपने दूतावास परिसर पर 1 अप्रैल को बमबारी के बाद आत्मरक्षा के रूप में कहा था. ईरान के विदेश मंत्री सहित क्षेत्रीय अधिकारियों ने कहा कि तेहरान ने अपने हमले से कुछ दिन पहले पड़ोसी देशों को नोटिस दिया था. हालांकि कनानी ने आगाह किया कि तेहरान इजरायल के प्रति अपनी सैन्य ताकतों से कैसे जवाब देगा, इसके बारे में किसी भी देश के साथ कोई पूर्व-निर्धारित समझौता नहीं किया गया है.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.

आज यु्द्ध का 24वां दिन है. इजरायल पर ईरान और जवाब में अमेरिका और इजरायल के ईरान पर ताबड़तोड़ हमले जारी हैं. इस बीच सवाल ये कि क्या डोनाल्ड ट्रंप हॉर्मुज पर फंस गए हैं. ट्रंप के बार-बार बदलते बयानों से लग रहा है कि जंग छेड़ने से पहले हॉर्मुज को लेकर ट्रंप सोच नहीं पाए थे. देखें कैसे बदलते जा रहे ट्रंप के बयान.









