
इकोसाइड को इंटरनेशनल क्राइम बनाने ICC में लगी अर्जी, क्या है ये, क्या कुदरत को नुकसान पहुंचाना नरसंहार जितना गंभीर अपराध?
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फिजी समेत कई देशों ने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) से गुहार लगाई कि इकोसाइड को नरसंहार की तरह ही बेहद गंभीर अपराध बना दिया जाए. क्लाइमेट चेंज की वजह से दुनियाभर में कुदरती तबाहियां आ रही हैं. ऐसे में इकोसाइड पर ये मांग लगातार जोर पकड़ने लगी. लेकिन क्या है इकोसाइड, और क्या किसी देश में इसे लेकर कोई कानून है?
हाल में तीन देशों- फिजी, समोआ और वानुअतु ने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (आईसीसी) से मांग की कि वो इकोसाइड को उसी श्रेणी में रख दे, जिसमें बाकी इंटरनेशनल अपराध आते हैं, जैसे युद्ध से जुड़े क्राइम, नरसंहार और नस्लभेद. कई और देशों में इसे पहले ही जुर्म मानकर इसपर सजा तय हो चुकी. ये देश पर्यावरण से किसी भी किस्म की छेड़छाड़ को गंभीर अपराध मानते हैं.
क्या है इकोसाइड, क्या इसे इंटरनेशनल क्राइम मान सकते हैं इस टर्म की कोई तयशुदा परिभाषा नहीं. बहुत से एक्सपर्ट के अनुसार, जानबूझकर किए गए वो काम, जो इस जानकारी के साथ किए जाते हैं कि उनकी वजह से पर्यावरण को स्थाई या अस्थाई लेकिन काफी गंभीर असर हो सकता है, इसे इकोसाइड कहते हैं.
इसे ऐसे समझ सकते हैं कि जैसे अमेजन का जंगल पूरी दुनिया में सबसे बड़ा रेन फॉरेस्ट है. दुनिया को मिलने वाली कुल ऑक्सीजन में से बड़ा प्रतिशत यहीं से आता है. इसे धरती के लंग्स भी कहा जाता रहा. लेकिन बीते दशकभर के अंदर इन फेफड़ों को तेजी से नुकसान पहुंचा. जंगलों की कटाई तो की ही गई, साथ ही वहां रहने वाली बस्तियों को उजाड़ दिया गया. लकड़ियों की तस्करी होती रही. ऐसे अपराध लगातार हो रहे हैं. ये ऑर्गेनाइज्ड क्राइम है. यही इकोसाइड है, यानी पर्यावरण की हत्या.
अमेरिका ने वियतनाम को बनाया था जहरीला
सबसे पहले ये टर्म अमेरिका-वियतनाम युद्ध के दौरान इस्तेमाल हुआ. तब अमेरिका ने वियतनाम की नदियों और जमीन को प्रदूषित करने के लिए वहां एक खास किस्म का जहर वहां की मिट्टी में फैला दिया. खुफिया भाषा में इसे एजेंट ऑरेंज कहा जा रहा था. काफी बाद में पता लगा कि अमेरिका ने दुश्मन देश को हराने के लिए उसके मिट्टी-पानी को जहर बना दिया था.

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