
आज महाराष्ट्र में वाधवन पोर्ट का शिलान्यास करेंगे PM मोदी, 76220 करोड़ के प्रोजेक्ट से 12 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार
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अत्याधुनिक तकनीक और बुनियादी ढांचे से लैस इस वाधवन बंदरगाह में गहरी गोदी, कुशल कार्गो हैंडलिंग सुविधाएं और आधुनिक बंदरगाह प्रबंधन प्रणाली जैसी सुविधाएं होंगी. यह बंदरगाह रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर पैदा करेगा और स्थानीय व्यवसायों को प्रोत्साहित कर क्षेत्र के समग्र आर्थिक विकास में योगदान देगा.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज महाराष्ट्र के मुंबई और पालघर का दौरा करेंगे. सुबह करीब 11 बजे प्रधानमंत्री मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (जीएफएफ) 2024 को संबोधित करेंगे. इसके बाद दोपहर करीब डेढ़ बजे प्रधानमंत्री पालघर के सिडको मैदान में विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे.
पालघर में प्रधानमंत्री वाधवन बंदरगाह की आधारशिला रखेंगे. इस परियोजना की कुल लागत लगभग 76,220 करोड़ रुपये है. इसका उद्देश्य एक विश्व स्तरीय समुद्री प्रवेश द्वार स्थापित कर देश के व्यापार और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है, जहां बड़े कंटेनर जहाजों की ज़रूरतें पूरी हो सके. इसमें समुद्र के तटीय तल को गहरा बनाकर तथा विशाल मालवाहक जहाजों को समायोजित किया जाएगा.
क्या है इस परियोजना की खासियत पालघर जिले के दहानू शहर के पास स्थित वाधवन बंदरगाह भारत के सबसे बड़े गहरे पानी के बंदरगाहों में से एक होगा. यह अंतरराष्ट्रीय नौवहन मार्गों (Shipping Routes) को सीधा संपर्क प्रदान करेगा, जिससे पारगमन समय (Transit Times ) और लागत कम होगी.
इस परियोजना का निर्माण वाधवन पोर्ट प्रोजेक्ट लिमिटेड (वीपीपीएल) द्वारा किया जाएगा, जो जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (जेएनपीए) और महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड (एमएमबी) द्वारा गठित एक स्पेशल परपज व्हीकल (एसपीवी) है, जिसमें उनकी हिस्सेदारी क्रमशः 74% और 26% है. वाधवन पोर्ट को महाराष्ट्र के पालघर जिले के वाधवन में ग्रीनफील्ड डीप ड्राफ्ट मेजर पोर्ट के रूप में विकसित किया जाएगा, जो सभी मौसमों में संचालन योग्य होगा.
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पत्तन/बंदरगाह में नौ कंटेनर टर्मिनल होंगे, जिनमें से प्रत्येक 1000 मीटर लंबा होगा, इसमें तटीय बर्थ सहित चार बहुउद्देशीय बर्थ, चार लिक्विड कार्गो बर्थ, एक रो-रो बर्थ और एक तटरक्षक बर्थ शामिल होंगे. इस परियोजना के तहत समुद्र में 1,448 हेक्टेयर क्षेत्र का पुनर्ग्रहण और 10.14 किलोमीटर अपतटीय ब्रेकवाटर और कंटेनर/कार्गो भंडारण क्षेत्रों का निर्माण शामिल है. परियोजना की संचयी क्षमता 298 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) प्रति वर्ष होगी, जिसमें लगभग 23.2 मिलियन टीईयू (बीस फुट समकक्ष) कंटेनर हैंडलिंग क्षमता शामिल है.

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