
West Indies Team weakness: 2 बार की वर्ल्ड चैम्पियन वेस्टइंडीज का ग्राफ नीचे कैसे गया, 3 प्वाइंट में समझें पिछले 20 साल की इनसाइड स्टोरी
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आखिर वो कौन से कारण हैं? जिस वजह से वेस्टइंडीज का क्रिकेट लगातार नीचे जा रहा है. अब तो वो वर्ल्ड कप से बाहर हो गया है. भारत का वेस्टइंडीज दौरा भी महत्वहीन लग रहा है. आखिर वेस्टइंडीज टीम अचानक इतनी कैसे कमजोर हो गई, आइए आपको बताते हैं.
'वेस्टइंडीज' वो टीम जिसकी कभी वर्ल्ड क्रिकेट में तूती बोलती थी, जिसके बल्लेबाजों से लेकर गेंदबाजों तक विश्व भर में डंका था. 70 के दशक में इस टीम से खेलने में दूसरी टीम की हालत पतली हो जाती थी. इस टीम के पास बल्लेबाज से लेकर गेंदबाज सब कुछ धाकड़ थे.
लेकिन 2 जुलाई 2023, इतिहास के पन्नों में उस तारीख के तौर पर दर्ज हो गई. जब यह 2 बार की ODI वर्ल्ड चैम्पियन वेस्टइंडीज ICC क्रिकेट वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाई. 48 साल बाद ऐसा हुआ, जब बिना विंडीज के 2023 का वर्ल्ड खेला जाएगा.
आखिर वो कौन सी 3 अहम वजह हैं? जिस वजह से वेस्टइंडीज क्रिकेट का ग्राफ लगातार नीचे गया है. भारत का वेस्टइंडीज दौरा भी नीरस लग रहा है.
कहानी सत्तर के दशक से शुरू करते हैं. 1975 और 1979 में इस टीम ने ODI वर्ल्ड कप जीता. 1983 में वर्ल्ड कप के फाइनल में जगह बनाई. शुरुआतती दोनों वर्ल्ड कप जीतने वाले टीम में क्लाइव लायड, गार्डन ग्रीनिज, विव रिचडर्स, डेसमंड हेंस, रोहन कन्हाई, एल्विन कालीचरण जैसे दिग्गज बल्लेबाजों की अहम भूमिका रही. 1975 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कप्तान क्लाइव लॉयड (102 रन और 1/38) प्लेयर ऑफ द मैच रहे, वहीं 1979 में विव रिचडर्स (138* रन) ने फाइनल में अंग्रेज टीम का जुलूस निकाल दिया. इस टीम के पास मैल्कम मार्शल, एंडी रॉबर्ट्स, जोएल गार्नर, माइकल होल्डिंग जैसी पेस बैटरी थी.
इसके बाद आने वाले दौर में भी वेस्टइंडीज के पास ब्रायन लारा, कार्ल हूपर, रिची रिचर्डसन, रामनरेश सरवन, शिवनरायन चंद्रपाल, जिमी एडम्स जैसे बल्लेबाज रहे. पिछले एक दशक से ज्यादा समय तक क्रिस गेल, मार्लन सैमुअल्स, वावेल हाइंडस, डैरेन सैमी, आंद्रे रसेल जैसे खिलाड़ी बल्लेबाजों की जगह पूरी करते रहे. गेंदबाजों में भी कर्टली एम्ब्रोस, कोर्टनी वॉल्श, इयान बिशप कमी 90 के दशक में पूरी करते रहे.
कारण 1: क्या टी-20 ज्यादा खेलने की वजह से विंडीज टीम कमजोर हुई? दुनिया भर में जैसे हीटी-20 क्रिकेट लीग शुरू हुई, वेस्टइंडीज के कई स्टार खिलाड़ी टीम से ज्यादा इन लीग को महत्व देने लगे. इनमें कई स्टार खिलाड़ी शामिल रहे. आंद्रे रसेल, सुनील नरेन, ड्वेन ब्रावो और किरोन पोलार्ड, क्रिस गेल नेशनल टीम से ज्यादा टी-20 लीग में खेलते हुए दिखे. जो विंडीज क्रिकेट टीम के पतन का अहम कारण बना.

2003 के क्रिकेट वर्ल्ड फाइनल में भारतीय टीम खिताब जीतने के लिए मैदान पर उतरी थी, लेकिन कुछ ही घंटों में ये सपना टूट गया था. रिकी पोंटिंग की तूफानी पारी, वीरेंद्र सहवाग की अकेली जंग और 'स्प्रिंग बैट' की रहस्यमयी अफवाहों ने इस मुकाबले को सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि क्रिकेट इतिहास की सबसे चर्चित और यादगार कहानी बना दिया.












