
'VIP गेस्ट आ रहे हैं, एक्स्ट्रा सर्विस चाहिए', वो आखिरी चैट जिसमें छुपा है अंकिता मर्डर केस का सबसे बड़ा राज़
AajTak
उत्तराखंड का अंकिता भंडारी हत्याकांड उजागर ही न होता अगर वो आखिरी चैट सामने ना आ पाती. अंकिता ने आखिरी बार जम्मू में रहने वाले अपने दोस्त के साथ चैंटिंग की थी. और वो तारीख थी 17 सितंबर. यानी कत्ल से एक रोज़ पहले. उस शाम अंकिता बेहद परेशान थी.
उत्तराखंड में अंकिता भंडारी मर्डर मिस्ट्री की कड़ियां एक-एक करके ऐसे जुड़ती जा रही हैं कि सब कुछ आइने की तरह साफ होने लगा है. मौत से पहले अंकिता का अपने दोस्त को चैट पर रिजॉर्ट में हो रही सारी करतूतें बताना, मौत के बाद उसके दोस्त और पुलकित के बीच बातचीत. इसके अलावा सीसीटीवी फुटेज से मिले सुराग ये साबित कर रहे हैं कि कैसे अंकिता को रिजॉर्ट के मालिक अपनी गंदी मानसिकता का शिकार बनाने की साजिश रचते रहे और जब नाकाम होने लगे तो उसकी जान ले ली.
असल में अंकिता भंडारी हत्याकांड उजागर ही न होता अगर वो आखिरी चैट सामने ना आ पाती. अंकिता ने आखिरी बार जम्मू में रहने वाले अपने दोस्त के साथ चैंटिंग की थी. और वो तारीख थी 17 सितंबर. यानी कत्ल से एक रोज़ पहले. उस शाम अंकिता बेहद परेशान थी. उसने अपने दोस्त पुष्प के सामने उसी वनंतरा रिजॉर्ट की पोल खोली थी, जहां वो रिसेप्शनिस्ट का काम कर रही थी.
17 सितंबर 2022, रात 9 बजकर 35 मिनट अंकिता की चैट गवाह है कि रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य के इरादे कितने गंदे थे. अंकिता ने अपने दोस्त के साथ चैट में क्या-क्या कहा ये खुद देख लीजिए-
अंकिता भंडारी- इस रिजॉर्ट में बहुत इनसिक्योर फील होता है. मैं क्या बोलूं, अंकित मेरे पास आया और बोला कुछ बात करनी है. फिर मैं उसके साथ गई.
दोस्त पुष्प- कॉल करके बताओ क्या हुआ?
अंकिता- नहीं, आवाज आएगी.

यूपी में जल जीवन मिशन में लापरवाही पर सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है. 12 जिलों के 26 इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 12 को निलंबित किया गया, जबकि अन्य पर जांच, नोटिस और तबादले की कार्रवाई हुई है. खराब गुणवत्ता, धीमी प्रगति और शिकायतों के बाद यह कदम उठाया गया. सरकार ने स्पष्ट किया है कि हर घर नल योजना में किसी भी तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

कड़क है नॉर्थ बंगाल की चुनावी चाय! 54 सीटों में छुपा सत्ता का स्वाद, स्विंग वोटर्स करेंगे असली फैसला
उत्तर बंगाल की 54 सीटें पश्चिम बंगाल की सत्ता की चाबी मानी जाती हैं, जहां चुनावी ‘चाय’ का स्वाद हर बार बदलता है. टीएमसी और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर में यह इलाका स्विंग जोन की भूमिका निभाता है. चाय बागान, पहाड़ी राजनीति, आदिवासी और राजवंशी वोटबैंक जैसे कई फैक्टर नतीजों को प्रभावित करते हैं. छोटे वोट शिफ्ट भी यहां बड़ा असर डाल सकते हैं, जिससे तय होगा कि राज्य की सत्ता किसके हाथ जाएगी.

मर तो वो 13 साल पहले गया था लेकिन मौत सचमुच तब उसके हिससे में आई जब इस चिता में लेटने के बाद जब हरीश की आत्मा की लाइट यानी रोशनी चिता से उठती इस आग के साथ मिलकर हमेशा-हमेशा के लिए ये दुनिया छोड़ गई. पर इस दुनिया को छोड़ने से पहले हरीश आजादा भारत के इतिहास का पहला भारतीय बन गया जिसे अदालत और अस्पताल ने मिलकर मां-बाप की इच्छा को ध्यान में रखते हुए इच्छामृत्यु दी.










