
तमिलनाडु: विधानसभा में राज्यपाल का वॉकआउट, सरकार का अभिभाषण पढ़ने से कर दिया इनकार
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तमिलनाडु विधानसभा में राज्यपाल आरएन रवि ने सरकार का अभिभाषण पढ़ने से इनकार करते हुए वॉकआउट कर दिया. CM स्टालिन ने इसे सदन की गरिमा का अपमान बताया और संविधान संशोधन की बात कही. ताजा स्थिति से राजभवन और सरकार के बीच टकराव तेज हो गया.
तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने मंगलवार को राज्य विधानसभा में सरकार द्वारा तैयार पारंपरिक अभिभाषण को पढ़ने से इनकार कर दिया और सदन से वॉकआउट कर दिया. राज्यपाल ने राज्य सरकार के टेक्स्ट में 'भ्रामक बयानों' और 'निराधार दावों' का हवाला देते हुए इसे पढ़ने के बजाय बीच में ही छोड़ दिया. साल 2023 से अब तक यह लगातार चौथी बार है जब राज्यपाल ने इस तरह वॉकआउट किया है. विधानसभा अध्यक्ष एम. अप्पावु द्वारा राज्यपाल से सरकार के मूल टेक्स्ट पर टिके रहने की गुजारिश के बाद विवाद बढ़ गया.
मुख्यमंत्री और द्रमुक (DMK) अध्यक्ष एमके स्टालिन ने इस घटना को सदन की गरिमा का अपमान बताया. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी समान विचारधारा वाले दलों के सहयोग से संसद में संविधान संशोधन की कोशिश करेगी, जिससे विधानसभा में राज्यपाल के जरूरी अभिभाषण के प्रावधान को हटाया जा सके.
स्पीकर ने बाद में सरकार का तैयार भाषण पढ़ा, जिसके विरोध में अन्नाद्रमुक (AIADMK) और पीएमके (PMK) जैसे विपक्षी दलों ने भी कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सदन से वॉकआउट किया.
राजभवन बनाम राज्य सरकार...
राज्यपाल के सदन से जाने के तुरंत बाद राजभवन ने एक बयान जारी करके सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. राजभवन ने दावा किया कि विधानसभा में राज्यपाल का माइक बंद कर दिया गया था और राष्ट्रगान का अपमान किया गया. राज्यपाल का कहना है कि सत्र की शुरुआत राष्ट्रगान से होना चाहिए, जबकि सरकार की परंपरा पहले तमिल गान और अंत में राष्ट्रगान बजाने की है. मंत्री एस. रघुपति ने राज्यपाल के माइक बंद करने के दावे को 'झूठ' करार दिया और कहा कि राज्यपाल सदन में केंद्र के बजाय अपना व्यक्तिगत प्रतिनिधि बनकर आए थे.
संवैधानिक संशोधन की मांग और स्टालिन का हमला

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