
चश्मदीद का पुलिस प्रेशर में U-टर्न? नोएडा में इंजीनियर युवराज की मौत पर पहले प्रशासन को घेरा, अब बदला बयान
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नोएडा में 27 वर्षीय इंजीनियर युवराज की दर्दनाक मौत के मामले में एसआईटी भले ही निष्पक्ष जांच और जल्द रिपोर्ट देने का दावा कर रही हो, लेकिन घटनास्थल पर मौजूद अहम चश्मदीद के बयान में आए बदलाव ने पूरे मामले को और पेचीदा बना दिया है.
नोएडा के पॉश इलाकों की चमक-धमक वाली सड़कों के पीछे प्रशासन और बिल्डरों की कितनी भयानक लापरवाही छिपी है. इसकी गवाही सेक्टर-150 का वो 'डेथ ट्रैप' दे रहा है जहां 27 वर्षीय इंजीनियर युवराज मेहता की जान चली गई. कहने को यह इलाका 'प्रीमियम' है, जहां फ्लैटों की कीमत 3 से 6 करोड़ रुपये है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यहां का इंफ्रास्ट्रक्चर किसी 'जंगलराज' से कम नहीं है. इस बीच घटना के चश्मदीद ने अपना बयान बदल दिया है, जिससे पुलिस पर दबाव बनाने जैसे आरोप भी लगने लगे हैं.
एसआईटी भले ही निष्पक्ष जांच और जल्द रिपोर्ट देने का दावा कर रही हो, लेकिन घटनास्थल पर मौजूद एक अहम चश्मदीद के बयान में आए बदलाव ने पूरे मामले को और पेचीदा बना दिया है. हादसे के समय मौके पर मौजूद चश्मदीद ने पहले बताया था कि रेस्क्यू टीमें दो घंटे तक तमाशा देखती रहीं, लेकिन अब वही पुलिस और रेस्क्यू टीमों को 'क्लीन चिट' देता दिख रहा है. हालांकि, इस 'यू-टर्न' के पीछे की कहानी संदिग्ध है. चश्मदीद ने खुद स्वीकार किया था कि उसे पुलिस ने 5 घंटे तक थाने में बिठाकर रखा था.
यहां देखें चश्मदीद ने कैसे बदला अपना बयान-
चश्मदीद ने शुरुआत में लगाए थे गंभीर आरोप
इस पूरी घटना के चश्मदीद मनिंदर ने शुरुआती दिनों में मीडिया के सामने दावा किया था कि हादसे के बाद करीब दो घंटे तक पुलिस, दमकल और SDRF की टीमें युवराज को बचाने के लिए पानी में नहीं उतरीं. मनिंदर ने अपने शुरुआती बयान में बताया था, "जब मैं पहुंचा, तो पुलिस, फायर ब्रिगेड, SDRF सब मौजूद थे. लोग बहुत थे, लेकिन कोई अंदर जाने को तैयार नहीं था. एजेंसियों के पास संसाधनों की कमी नहीं थी. नाव थी, सेफ्टी जैकेट थी, सौ मीटर तक रस्सियां थीं. फिर भी कोई नाले में उतरने को तैयार नहीं था. फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों का कहना था कि नाले में सरिया है, अंदर गए तो फंस सकते हैं."
अब चश्मदीद ने पुलिस को दी क्लीन चिट

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