
युवराज की कार तीन दिन बाद बरामद, बिल्डर को भेजा गया जेल... अब इन सवालों के जवाब तलाशेगी SIT
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एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने मंगलवार को जब नाले से ग्रे रंग की ग्रैंड विटारा कार निकाली, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं. यह कार केवल लोहे का ढांचा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की उस 'सरकारी कुव्यवस्था' का मेडल है, जो उन दावों की पोल खोल रही है जिनमें जनता की सुरक्षा की कसमें खाई जाती हैं.
उत्तर प्रदेश के शो-विंडो कहे जाने वाले नोएडा के सेक्टर-150 में 27 वर्षीय इंजीनियर युवराज मेहता की मौत ने पूरे देश के सरकारी तंत्र और प्रशासनिक संवेदनहीनता को कटघरे में खड़ा कर दिया है. जिस कार में बैठकर युवराज शुक्रवार रात गुरुग्राम से अपने घर के लिए निकले थे, उसे निकालने में प्रशासन को पूरे चार दिन (करीब 90 घंटे) लग गए. यह कार केवल लोहे का ढांचा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की उस 'सरकारी कुव्यवस्था' का मेडल है, जो उन दावों की पोल खोल रही है जिनमें जनता की सुरक्षा की कसमें खाई जाती हैं.
मंगलवार को जब एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने उस मौत के नाले से ग्रे रंग की ग्रैंड विटारा कार निकाली, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं. यह वही कार है जिसके ऊपर चढ़कर युवराज दो घंटे से ज्यादा समय तक टॉर्च जलाकर मदद की गुहार लगाते रहे थे. मौके पर पुलिस, दमकल और राहत विभाग के करीब 80 लोग मौजूद थे, लेकिन किसी ने भी उस डूबते हुए युवक को बचाने के लिए पानी में छलांग नहीं लगाई.
अगर उस रात रेस्क्यू टीम नीचे उतरती तो शायद दो घंटे से ज्यादा टॉर्च की रोशनी दिखाकर मदद मांगता युवराज आज जिंदा होता. मृतक के पिता राजकुमार मेहता का दर्द सिस्टम पर सबसे बड़ा प्रहार है. उनका कहना है कि अगर टीम के पास उनके पास अगर स्विमर और बोट नहीं थी तो उन्हें वहां क्यों भेजा गया था? अगर टीम में तैराक होते तो शायद बचाया जा सकता था.
घटना के 20 दिन पहले भी यही जगह खतरे में थी
इस पूरे मामले का सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या यह हादसा पहले से रोक जा सकता था? आजतक की ग्राउंड रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 31 दिसंबर को इसी एल-शेप मोड़ पर एक ट्रक धुंध के बीच नाले की दीवार से टकराकर लटक गया था. तब ड्राइवर की जान बच गई थी और उस समय भी प्रशासन ने केवल क्रेन से ट्रक हटाया, लेकिन बोल्डर, बैरिकेड, चेतावनी बोर्ड जैसी सुरक्षा व्यवस्था नहीं की. अगर तब यह किया जाता, तो शायद आज युवराज की जान बच सकती थी. अब उस रास्ते पर सीमेंट के रोड ब्लॉकर, बैरिकेड और रस्सी लगाई गई है. लेकिन यह व्यवस्था सिर्फ उसी मोड़ तक है, बाकी जगहों पर खतरा वैसा ही बना हुआ है.

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