
रबर स्टांप नहीं हैं बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन, नरेंद्र मोदी ने यूं ही नहीं कहा ‘बॉस‘
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बीजेपी अध्यक्ष के रूप में नितिन नबीन को कमजोर समझने वाले मुगालते में हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनको अगर बॉस कहा और अपना नेता माना है तो जाहिर है कि इसके पीछे कुछ कारण हैं.
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर नितिन नवीन की ताजपोशी हो चुकी है. BJP संविधान (Bharatiya Janata Party Constitution) के अनुसार यह पार्टी का सर्वोच्च संगठनात्मक प्रमुख होता है. अध्यक्ष पार्टी की रीढ़, निर्णय लेने वाला और चुनावी कमांडर होता है. पर कुछ लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के विराट व्यक्तित्व के आगे नितिन नबीन क्या फैसले ले पाएंगे? शायद यही कारण है कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के सामने बीजेपी अध्यक्ष नबीन को बॉस कहकर संबोधित किया. मोदी के हर कदम में भविष्य की झलकियां होती हैं.
मोदी ने नबीन को बॉस बोलकर आम कार्यकर्ताओं को संदेश दे दिया कि बीजेपी में कोई भी कार्यकर्ता छोटा नहीं होता है. और इसी बात को आगे बढ़ाते हुए पार्टी अध्यक्ष के रूप में पहला भाषण देते हुए नबीन कहा कि सभी कार्यकर्ता और मंडल स्तर पर काम कर रहे नेता यह विश्वास रखें कि पार्टी का वॉच टावर उन पर बारीकी से नजर रखे हुए है. यदि मुझ जैसा कार्यकर्ता पार्टी का अध्यक्ष बन सकता है तो आप भी बन सकते हैं. भाजपा के पास करोड़ों की संख्या में कार्यकर्ता हैं. और यही पार्टी की जिम्मेदारी संभालते हैं, और वे पार्टी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी हैं. उनके मोटिवेट रखना. हालांकि, बड़ी हद तक उनमें ऊर्जा भरने का काम पार्टी की विचारधारा करती है. लेकिन, अंत में प्रमोशन तो सबको चाहिए. नबीन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी यही है कि वे कार्यकर्ताओं के बीच जाएं और ये बताएं कि वे अध्यक्ष बने हैं, पीएम मोदी प्रधानमंत्री और अमित शाह गृहमंत्री तो इनमें से कोई भी पैराशूट से नहीं आया है. भाजपा एक कार्यकर्ता की पार्टी है और इस कैंपेन के नए ब्रांड एम्बेसेडर हैं नितिन नबीन.
बीजेपी अध्यक्ष की कुर्सी कितनी पावरफुल
BJP संविधान (Bharatiya Janata Party Constitution) के अनुसार अध्यक्ष पार्टी का सर्वोच्च संगठनात्मक प्रमुख होता है. अध्यक्ष पार्टी की रीढ़, निर्णय लेने वाला और चुनावी कमांडर होता है. यह पद रबर स्टांप नहीं, बल्कि पार्टी को दिशा देने, कार्यकर्ताओं को एकजुट करने और राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने की असली शक्ति रखता है. बीजेपी अध्यक्ष की कुर्सी कितनी पावरफुल होती है वो इसकी शक्तियों से समझा जा सकता है.
राष्ट्रीय अध्यक्ष पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी (120 सदस्यों तक) का प्रमुख होता है. अध्यक्ष ही सदस्य नामांकित करता है. महासचिव, कोषाध्यक्ष, उपाध्यक्ष आदि की नियुक्त करता है. राज्य इकाइयों (प्रदेश अध्यक्ष) की नियुक्ति/हटाने में निर्णायक भूमिका होती है.
लोकसभा/विधानसभा चुनावों में उम्मीदवारों की अंतिम सूची भी तय करता है. अमित शाह (2014-19) ने अध्यक्ष रहकर 282-303 सीटों की जीत की रणनीति बनाई.इसके अलावा उसे पार्टी संविधान की व्याख्या, संशोधन और नियम बनाने का अधिकार भी है. वह राष्ट्रीय परिषद/कार्यकारिणी की बैठकें बुलाता है, एजेंडा तय करता है.

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