
इतने आवारा कुत्ते...रात भर भौंकते हैं, नीद हराम है... सुप्रीम कोर्ट ने सुनीं लोगों की दलीलें, 28 को होगा फैसला
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कोर्ट ने पारदर्शी और जवाबदेह प्रणाली बनाने पर जोर दिया ताकि बिना नसबंदी वाले कुत्तों की रिपोर्टिंग हो सके. 28 जनवरी को सरकारों की ओर से सॉलिसिटर जनरल अपनी दलीलें प्रस्तुत करेंगे. कोर्ट ने एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट के पॉडकास्ट पर नाराजगी जताई और मामले की गंभीरता को रेखांकित किया. ये सुनवाई आवारा कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
देश के सार्वजनिक स्थलों पर आवारा कुत्तों के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुन लीं. अब 28 जनवरी को इन दलीलों का जवाब और किए जा रहे उपायों पर चर्चा होगी.
मंगलवार को सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि जिस इलाके में मैं रहता हूं, वहां बहुत सारे आवारा कुत्ते हैं. वे पूरी रात एक दूसरे का पीछा करते रहते हैं. मुझे नींद न आने की बीमारी है. मेरा सोना मुश्किल हो गया है. मेरे बच्चे पढ़ नहीं पाते. मैंने अधिकारियों से शिकायत की. उन्होंने कहा कि वे सिर्फ वैक्सीनेशन और स्टेरिलाइजेशन कर सकते हैं. मैंने NHRC को भी लिखा, कुछ नहीं हुआ. ABC नियम एक खास दायरे में काम करते हैं.
कुत्तों को स्टेरिलाइजेशन या वैक्सीनेशन के लिए ले जाने पर ही उन्हें वापस छोड़ा जाएगा. लेकिन BNS कहता है कि अगर परेशानी हो रही है तो स्थानीय अधिकारी कुत्तों को हटा सकते हैं.
एडवोकेट प्रशांत भूषण ने कहा कि ये बात दुनिया भर में मानी गई है कि आपके पास नसबंदी का एक असरदार सिस्टम होना चाहिए. हालांकि ये नसबंदी सिस्टम जयपुर, गोवा वगैरह में काम कर चुके हैं, लेकिन ज्यादातर शहरों में ये नसबंदी सिस्टम काम नहीं किया है. स्टेरिलाइजेशन से आक्रामकता कम होती है. समस्या ये है कि बहुत सारे शहरों में असरदार स्टेरिलाइजेशन नहीं हो रहा है. इसे असरदार बनाने का तरीका है इसे पारदर्शी बनाना और लोगों को जवाबदेह बनाना. एक ऐसा सिस्टम होना चाहिए जहां लोग उन आवारा कुत्तों की रिपोर्ट कर सकें जो स्टेरिलाइज्ड नहीं लगते हैं. इसे किसी वेबसाइट पर रिकॉर्ड या रिपोर्ट किया जाना चाहिए.
कुछ खास अथॉरिटी होनी चाहिए जिनकी जिम्मेदारी बिना स्टेरिलाइज्ड आवारा कुत्तों की शिकायत पर कार्रवाई करना होगा. प्रशांत भूषण के सुझाव पर जस्टिस मेहता ने कहा कि हम कुत्तों से खुद सर्टिफिकेट लेकर चलने के लिए क्यों नहीं कह सकते?
भूषण ने कहा कि कभी-कभी कोर्ट की टिप्पणियों से बुरे मैसेज जाते हैं. उदाहरण के लिए इसी कोर्ट ने कहा कि कुत्तों के काटने के लिए फीडर्स को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए. शायद यह एक व्यंग्य था.

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