
Sanju Samson: चले तो चांद तक वरना शाम तक... टीम इंडिया के इस खिलाड़ी की कहानी ऐसी क्यों है?
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टीम इंडिया के एक खिलाड़ी की कहानी ऊपर बताई गई हेडलाइन की तरह है. अगर वो चलते हैं तो जबरदस्त खेलते हैं, वरना लगातार फेल होते हैं. आखिर इस प्लेयर के साथ दिक्कत क्या है? क्या एशिया कप में वो अपना जलवा बिखेर पाएंगे, यह बड़ा सवाल है.
टीम इंडिया के खिलाड़ी अब 9 सितंबर से UAE (यूनाइटेड अरब अमीरात) में शुरू हो रहे एशिया कप में खेलते हुए नजर आएंगे. सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में खेलने के लिए उतरने वाली भारतीय टीम का पहला मुकाबला 10 सितंबर को मेजबान UAE से होना है. सभी मुकाबले दुबई के दुबई इंटरनेशल क्रिकेट स्टेडियम और अबू धाबी के शेख जायेद स्टेडियम में हैं.
15 सदस्यीय टीम इंडिया के अलावा दौरे के लिए 5 स्टैंडबाय प्लेयर्स को भी मौका दिया गया है. कप्तानी सूर्यकमार यादव तो उनके डिप्टी शुभमन गिल होंगे.
लेकिन इसी टीम इंडिया में चुने एक खिलाड़ी की कहानी 'चले तो चांद तक वरना शाम तक' जैसी है. यानी अगर कामयाबी मिली तो बहुत बड़ी मिलेगी (सीधा चांद तक पहुंच जाएंगे), और अगर नाकामयाब हुए तो शाम तक (मतलब जल्दी ही) सब खत्म हो जाएगा.
दरअसल, इस कहावत पर संजू सैमसन की कहानी एकदम फिट बैठती है. संजू ने पिछले 5 टी20 इंटरनेशनल मुकाबलों में 51 रन बनाए हैं, उससे पहले ही 5 मैचों में 3 शतक बनाए और 2 बार वो 0 पर भी आउट हुए. यानी जब संजू चलते हैं तो वो विपक्षी टीम को रगड़कर रख देते हैं, वरना वो लगातार फ्लॉप होते हैं.
साल 2020 में गौतम गंभीर ने सैमसन को लेकर एक पोस्ट किया था और लिखा था कि संजू सैमसन भारत के सर्वश्रेष्ठ विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं. वहीं उनको बेस्ट यंग बैटर भी कहा था. गंभीर ने पोस्ट में यह भी लिखा था कि क्या कोई डिबेट के लिए तैयार है?
Sanju Samson is not just the best wicketkeeper batsmen in India but the best young batsman in India! Anyone up for debate?

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