
Sachin Tendulkar: जब सचिन तेंदुलकर के सामने नतमस्तक हुआ था पाकिस्तान, वकार यूनुस भी रह गए थे हैरान
AajTak
दुनिया के महानतम बल्लेबाजों में से एक सचिन तेंदुलकर ने आज ही के दिन (24 नवंबर) पाकिस्तान के खिलाफ यादगार पारी खेली थी. इसके साथ ही सचिन सबसे कम उम्र में टेस्ट अर्धशतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए थे. सचिन ने उस अर्धशतकीय पारी के बाद रिकॉर्ड्स की झड़ी लगाकर रख दी.
महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के लिए 24 नवंबर बेहद खास है. 33 साल पहले 1989 में आज ही के दिन सचिन तेंदुलकर ने अपने क्रिकेट करियर का पहला अर्धशतक लगाया था. सचिन ने यह अर्धशतकीय पारी फैसलाबाद टेस्ट मैच में पाकिस्तानी टीम के खिलाफ खेली थी. सचिन ने 59 रनों की इस पारी में कुल 172 गेंदों का सामना किया था और कुल चार चौके लगाए थे.
सचिन ने यह अर्धशतक 16 साल और 214 दिन की उम्र में जड़ा था. इसके साथ ही सचिन सबसे कम उम्र में टेस्ट अर्धशतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए थे. सचिन का यह रिकॉर्ड आज भी कायम है. देखा जाए तो सचिन की ये पारी उस समय आई थी जब भारत संघर्ष कर रहा था क्योंकि उस टेस्ट की पहली पारी में एक समय भारतीय टीम के 4 विकेट 38 रन पर गिर गए थे.
मांजरेकर के साथ हुई थी शानदार पार्टनरशिप
लेकिन इसके बाद सचिन तेंदुलकर और संजय मांजरेकर बीच पांचवें विकेट के लिए 143 रनों की साझेदारी हुई थी, जिसके चलते भारत पहली पारी में 288 रनों के स्कोर तक पहुंच पाया था. मुकाबले की बात करें तो वह टेस्ट मैच ड्रॉ पर समाप्त हुआ था. सचिन ने फैसलाबाद टेस्ट मैच से ठीक पहले कराची के मैदान पर हुए सीरीज के पहले टेस्ट मैच के जरिए डेब्यू किया था. फैसलाबाद के बाद लाहौर टेस्ट मैच में भी में तेंदुलकर एक और अर्धशतक के करीब पहंचे, लेकिन 41 रन बनाकर अब्दुल कादिर की गेंद पर बोल्ड हो गए थे.
वकार यूनुस को हुई थी हैरानी
सचिन तेंदुलकर ने डेब्यू टेस्ट सीरीज में जैसी बैटिंग की थी उससे वकार यूनुस भी हैरान रह गए थे. वकार ने विजडन के एक पॉडकास्ट ‘The Greatest Rivalry’ में कहा था, 'पहला टेस्ट कराची में था और मैंने उसे (सचिन) जल्दी आउट कर दिया था. मुझे लगता है कि उसने 15 रन बनाए होंगे. उसने अपनी छोटी पारी के दौरान दो अच्छे ऑन और स्ट्रेट ड्राइव खेले. उस सीरीज में सियालकोट (सीरीज का आखिरी टेस्ट) के ग्रीन टॉप विकेट पर वह अर्धशतक (57) जड़ने में कामयाब रहा. इस पारी के दौरान शुरू में ही उसे नाक पर गेंद लगी. 16 साल का बच्चा... चोट के बाद बिल्कुल पीला-सा पड़ गया था, लेकिन बहुत दृढ़ था.'

2003 के क्रिकेट वर्ल्ड फाइनल में भारतीय टीम खिताब जीतने के लिए मैदान पर उतरी थी, लेकिन कुछ ही घंटों में ये सपना टूट गया था. रिकी पोंटिंग की तूफानी पारी, वीरेंद्र सहवाग की अकेली जंग और 'स्प्रिंग बैट' की रहस्यमयी अफवाहों ने इस मुकाबले को सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि क्रिकेट इतिहास की सबसे चर्चित और यादगार कहानी बना दिया.












