
Pakistan And Ram Mandir: रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद पाकिस्तान ने उगला जहर, भारत को लेकर कही ये बात
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राम मंदिर में रामलला की मूर्ति स्थापना के बाद सोमवार को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत में 31 सालों के घटनाक्रम अयोध्या में आज के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का नतीजा है. ये भारत में बढ़ रहे बहुसंख्यकवाद का संकेत हैं. ये भारतीय मुसलमानों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हाशिए पर पहुंचाने के लिए चल रहे प्रयासों का एक महत्वपूर्ण पहलू है.
अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा को लेकर पाकिस्तान सरकार की प्रतिक्रिया सामने आई है. पाकिस्तान सरकार ने राम मंदिर के उद्घाटन को भारत में बढ़ रहे बहुसंख्यकवाद (majoritarianism) का संकेत बताया है.
राम मंदिर में रामलला की मूर्ति स्थापना के बाद सोमवार को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर बाबरी मस्जिद विध्वंस की जगह पर राम मंदिर के उद्घाटन की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि उन्मादी भीड़ ने छह दिसंबर 1992 को सदियों पुरानी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया था. ये निंदनीय है कि ना सिर्फ भारत की सबसे बड़ी अदालत ने इस घटना के जिम्मेदार लोगों को बरी कर दिया बल्कि उसी जगह पर राम मंदिर निर्माण की मंजूरी भी दी.
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बयान में कहा गया कि 31 सालों के इन घटनाक्रमों का नतीजा राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा है, जो भारत में बढ़ रहे बहुसंख्यकवाद का संकेत है. ये भारतीय मुसलमानों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हाशिए पर पहुंचाने के लिए चल रहे प्रयासों का एक महत्वपूर्ण पहलू है.
पाकिस्तान ने बयान में कहा कि ध्वस्त की गई मस्जिद की जगह पर मंदिर का निर्माण सदियों तक भारत के लोकतंत्र पर धब्बा रहेगा. भले ही वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद सहित देश में कई मस्जिदों की संख्या बढ़ रही हो लेकिन उन पर भी ढहाए जाने का खतरा मंडरा रहा है.
बयान में कहा गया कि 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देकर राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ किया. कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने केंद्र को निर्देश दिया था कि वे अयोध्या में मस्जिद निर्माण के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ की जमीन दे. भारत में बढ़ रही हिंदुत्व की विचारधारा से देश के धार्मिक सौहार्द और क्षेत्रीय शांति को खतरा है.

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