
NCP से जमीन पर टकराव, बड़ें मंत्रालय ना मिलने की टीस, क्या इसलिए बागी हुए शिवसेना विधायक?
AajTak
महाराष्ट्र में जारी सियासी संकट के कई कारण माने जा रहे हैं. एक कारण तो एनसीपी से जुड़ा हुआ भी दिख रहा है. शिवसेना का एक गुट इस बात से खासा नाराज चल रहा था कि सरकार में एनसीपी को ज्यादा तवज्जो दी गई, बड़े मंत्रालय दिए गए.
महाराष्ट्र में उद्धव सरकार का सत्ता में बने रहना मुश्किल साबित हो रहा है. एकनाथ शिंदे के बड़े दावे और लगातार हो रही बैठकों के दौर ने जमीन पर महा विकास अघाडी की डगर को बीच मझधारमें फंसा दिया है. सवाल ये उठने लगा है कि आखिर किन कारणों से शिवसेना के विधायक बागी हो गए? जिनकी पार्टी से मुख्यमंत्री बनाया गया, उसी के विधायक अब अलग होने की बात क्यों करने लगे?
अब कहा जा रहा है कि कहने को शिवसेना का एनसीपी और कांग्रेस के साथ गठबंधन हुआ, लेकिन वैचारिक मतभेद की वजह से जमीन पर टकाराव की स्थिति कई मौकों पर देखने को मिली. एनसीपी के साथ तो शिवसेना की जमीन पर जबरदस्त टक्कर दिखी. पश्चिमी महाराष्ट्र में तो शिवसेना के विधायक खासा नाराज बताए गए. बताया गया कि जिन क्षेत्रों में शिवसेना के ज्यादा विधायक रहे, वहां गार्जियन मिनिस्टर किसी एनसीपी नेता को बना दिया गया. आरोप लगने लगे कि विधायकों की मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है.
दावा तो ये भी हुआ कि कई मौकों पर विधायकों को जरूरी फंड तक उपलब्ध नहीं करवाए गए. उस स्थिति में एकनाथ शिंदे ने उन विधायकों को जरूरी फंड भी दिलवाए और कई योजनाओं का ऐलान भी किया. इसके अलावा कोरोना काल के दौरान भी एकनाथ शिंदे ने सांसदों को शहरी विकास मंत्रालय की तरफ से फंड दिलवाए थे, ऐसा कर उन्होंने कई शिवसैनिकों का दिल जीत लिया था.
वैसे बागी विधायकों की नाराजगी की एक वजह ये भी मानी जा रहा है कि सरकार में एनसीपी को ज्यादा बड़े मंत्रालय दे दिए गए. फिर चाहे वो वित्त मंत्रालय रहा हो या फिर सिचाई मंत्रालय. ऐसे में टकराव की स्थिति लगातार और कई बार पैदा होती रही. इसके अलावा कुछ मौकों पर बागियों को ऐसा भी प्रतीत हुआ कि एनसीपी, शिवसेना पर हावी होने की कोशिश कर रही है.
अब अगर एनसीपी जमीन पर ज्यादा सक्रिय दिख रही थी, तो इसके भी अपने कारण माने जा रहे हैं. सरकार बनने से पहले एनसीपी को उस समय बड़ा झटका लगा था जब अजित पवार ने बीजेपी से हाथ मिला लिया और अगले दिन डिप्टी सीएम के रूप में शपथ भी ले ली. वो सरकार तो नहीं चल पाई, लेकिन एनसीपी को एक संदेश स्पष्ट मिल गया था. उन्हें अपने तमाम विधायकों, कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की जरूरत थी. इसी वजह से जमीन पर संगठन को मजबूत करने पर पूरा जोर दिया गया.
माना जा रहा है कि इन्हीं सब गतिविधियों ने जमीन पर कुछ शिवसैनिकों को नाराज कर दिया, वे अपनी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से ही खफा चलने लगे. खुलकर किसी ने कुछ नहीं बोला, लिहाजा उद्धव ठाकरे भी इस संकट को नहीं भाप पाए. लेकिन अब स्थिति अलग है, सरकार बचाने की जरूरत है, कर पाते हैं या नहीं, इस पर सभी की नजर रहेगी.

काशी के मणिकर्णिका घाट पर इन दिनों कायाकल्प का काम चल रहा है, जिसको लेकर तोड़फोड़ और मूर्तियों के नुकसान के आरोपों पर सियासी घमासान मचा हुआ है. सरकार का कहना है कि घाट को विश्व स्तरीय सुविधाओं के साथ नए सिरे से विकसित किया जा रहा है. इसके लिए पहले चरण में 35 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं और बड़ा प्लेटफार्म बनाया जाएगा ताकि एक साथ अंतिम संस्कार की बेहतर व्यवस्था हो सके.

पंजाब के बठिंडा में गुरथरी गांव के पास एक फॉर्च्यूनर कार डिवाइडर से टकरा गई, जिससे भीषण हादसा हुआ. इसमें पांच लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक महिला पुलिस कांस्टेबल भी शामिल है. सभी गुजरात के रहने वाले थे और घूमने आए थे. सुबह के कोहरे को हादसे की वजह बताया जा रहा है. पुलिस जांच कर रही है और शवों को बठिंडा सरकारी अस्पताल में भेजा गया है.

बीएमसी चुनाव में करारी हार के बाद पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (उद्धव गुट) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एकनाथ शिंदे पर हमला बोला. नवनिर्वाचित नगरसेवकों को संबोधित करते हुए उन्होंने हार के कारणों पर खुलकर बात की और बीजेपी-शिवसेना शिंदे गुट पर निशाना साधा. ठाकरे ने कहा कि सत्ता, पैसा और दबाव से लोग तोड़े जा सकते हैं, लेकिन जमीनी शिवसेना और कार्यकर्ताओं की निष्ठा को कभी खरीदा नहीं जा सकता.

वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर पुनरुद्धार कार्य के दौरान ऐतिहासिक चबूतरे और अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति को बुलडोजर से ढहाए जाने के बाद लोगों के गुस्सा फूट पड़ा है. हालांकि, वाराणसी के मेयर और क्षेत्रीय विधायक ने मणिकर्णिका घाट पहुंचे इस मामले पर सफाई भी दी है. इसी बीच सूबे के मुख्यमंत्री योगी भी वारासणी पहुंच गए हैं.

AAP की नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी पर सिख गुरुओं के अपमान का मामला तेजी से बढ़ता जा रहा है. दिल्ली विधानसभा की ओर से आतिशी को नोटिस जारी किया गया है और उनसे 19 जनवरी तक लिखित जवाब मांगा गया है. स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष आतिशी का वीडियो जांच के लिए फॉरेंसिक लेबोरेटरी (FSL) को भेजा गया था. अब FSL की रिपोर्ट आ चुकी है, जिसके आधार पर नोटिस दिया गया है.








