
Mette Frederiksen: डेनमार्क की सबसे कम उम्र की PM, जिसने ठुकरा दिया था ट्रंप का प्रस्ताव
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डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने कम समय में लंबा राजनीतिक सफर तय कर लिया है. वे डेनमार्क की सबसे कम उम्र वालीं प्रधानमंत्री हैं. इसके अलावा वे अपने कठोर फैसलों की वजह से हमेशा चर्चा में बनी रहती हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को डेनमार्क की पीएम मेटे फ्रेडरिक्सन से मुलाकात की. दोनों नेताओं के बीच कई मुद्दों पर सहमति बनी और बाद में एक साझा बयान भी जारी किया गया. जो तस्वीरें भी सामने आईं उनको देख कहा गया कि आने वाले समय में भारत और डेनमार्क की एक मजबूत साझेदारी दिखने वाला है.
लेकिन इस सब के बीच सवाल तो ये भी है कि आखिर मेटे फ्रेडरिक्सन से पीएम की कुर्सी तक का ये सफर कैसे तय किया? कैसे मेटे फ्रेडरिक्सन डेनमार्क की सबसे युवा प्रधानमंत्री बन गईं? अब डेनमार्क पीएम की जैसी राजनीति रही है, जैसा उनका अंदाज है, वे हर मुद्दे पर हमेशा खुलकर बोलने में विश्वास दिखाती हैं.
यूक्रेन का समर्थन, रूस के खिलाफ उठाई आवाज
इस समय जब रूस और यूक्रेन के बीच में भीषण युद्ध जारी है, मेटे फ्रेडरिक्सन ने साफ तौर पर अपने देश का स्टैंड स्पष्ट कर दिया है. यूक्रेन की दोनों हाथों से मदद की जा रही है, लगातार हथियारों की सप्लाई हो रही है और खुद पीएम मेटे भी यूक्रेन का दौरा कर चुकी हैं. उनका देश नेटो का सदस्य है, ऐसे में रूस की धमकी उन्हें भी लगातार मिली है. लेकिन इस सब के बावजूद भी वे ना झुकी हैं और ना ही अपने सिद्धांतों से उन्होंंने कोई समझौता किया है.
ट्रंप के प्रस्ताव को किया था खारिज
इससे पहले भी डेनमार्क पीएम की एक ऐसी छवि देखने को मिली है जहां पर वे कोई भी फैसला किसी को खुश करने के लिए नहीं लेती हैं. जो भी उन्हें सही लगता है, उनका कदम सिर्फ और सिर्फ उस दिशा में आगे बढ़ जाता है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण तब देखने को मिल गया था जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डेनमार्क में मौजूद द्वीप ग्रीनलैंड को खरीदने की पेशकश की थी. अब यहां पर ये जानना जरूरी हो जाता है कि ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है और अमेरिका द्वारा 1946 में भी इसे खरीदने की कोशिश की गई थी.

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