
IPL से गायब हो गईं ये 5 टीमें... कोई बना चैम्पियन तो कोई कोर्ट पहुंचा, अब कभी नहीं होगी वापसी
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इंडियन प्रीमियर लीग भले ही 10 टीमों के साथ दुनिया की सबसे अमीर और लोकप्रिय क्रिकेट लीग बन चुका है, लेकिन इसकी कहानी में कुछ ऐसे नाम भी हैं जो वक्त के साथ गायब हो गए. अब तक 5 टीमें ऐसी रहीं, जिन्होंने IPL में एंट्री ली, यादें छोड़ीं और फिर अचानक लीग से बाहर हो गईं. सवाल यह है कि आखिर इन टीमों के साथ ऐसा क्या हुआ...
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के 19वें सीजन की 28 मार्च से हो रही है. ओपनर मुकाबला बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेला जाएगा, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) की टीम्स आमने-सामने होंगी. पिछले कुछ सीजन की तरह इस बार भी आईपीएल में 10 टीमें भाग लेने जा रही हैं.
इनमें पंजाब किंग्स (PBKS), दिल्ली कैपिटल्स (DC), रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB), मुंबई इंडियंस (MI), चेन्नई सुपर किंग्स (CSK), राजस्थान रॉयल्स (RR), लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG), कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR), गुजरात टाइटन्स (GT) और सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) शामिल हैं.
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) आज भले ही दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग बन चुकी है, लेकिन इसकी शुरुआत से लेकर अब तक कई टीमें ऐसी भी रहीं, जो कुछ समय खेलने के बाद हमेशा के लिए गायब हो गईं. 2008 से अब तक कुल 5 फ्रेंचाइजी टीम्स ऐसी रही हैं, जो IPL का हिस्सा बनने के बाद अलग-अलग कारणों से लीग से बाहर हो गईं और फिर कभी वापसी नहीं कर सकीं.
चार्जर्स की कहानी सबसे अजब हैदराबादी टीम डेक्कन चार्जर्स की कहानी सबसे अनोखी रही. 2008 में आखिरी स्थान पर रहने वाली यह टीम 2009 में एडम गिलक्रिस्ट की कप्तानी में चैम्पियन बनी. इसके बाद 2010 में सेमीफाइनल और 2011 में प्लेऑफ तक पहुंची. लेकिन आर्थिक संकट ने टीम को खत्म कर दिया. फ्रेंचाइजी मालिक कर्ज में डूब गए और भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) को जरूरी बैंक गारंटी नहीं दे पाए. सिर्फ एक दिन की देरी के कारण बीसीसीआई ने डेक्कन चार्जर्स का कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिया. 2013 में डेक्कन चार्जर्स की जगह सनराइजर्स हैदराबाद को शामिल किया गया.
एक सीजन बाद ही खत्म हुआ कोच्चि का खेल कोच्चि टस्कर्स केरला साल 2011 में आईपीएल में शामिल हुई, लेकिन सिर्फ एक सीजन के बाद ही बाहर हो गई. कप्तान महेला जयवर्धने, ब्रैंडन मैक्कुलम और रवींद्र जडेजा जैसे सितारे उस सीजन में टीम का हिस्सा थे. हालांकि इस टीम ने 14 में से 6 मैच जीते और पांचवें स्थान पर रही. मालिकों के बीच विवाद और बैंक गारंटी (₹156 करोड़) ना देने के कारण बीसीसीआई ने कॉन्ट्रैक्ट समाप्त कर दिया. बाद में इस मामले में अदालत ने बीसीसीआई को दोषी ठहराते हुए ₹800 करोड़ से ज्यादा मुआवजा देने का आदेश दिया, लेकिन टीम की वापसी नहीं हो सकी.
वॉरियर्स ने तीन सीजन खेले और निराश किया पुणे वॉरियर्स इंडिया ने भी 2011 के सीजन के जरिए आईपीएल में एंट्री ली, लेकिन सिर्फ तीन सीजन बाद यह टीम लीग से बाहर हो गई. यह फ्रेंचाइजी टीम सहारा ग्रुप के मालिकाना हक में थी और उस समय करीब 370 मिलियन डॉलर (लगभग ₹3000 करोड़) में खरीदी गई थी, जिससे यह उस दौर की सबसे महंगी टीम बन गई थी. वॉरियर्स की परेशानी शुरुआत से ही शुरू हो गई थी. सहारा ग्रुप ने टीम के लिए बोली 94 मैचों के सीजन के आधार पर लगाई थी, लेकिन बाद में बीसीसीआई ने मैचों की संख्या घटाकर 74 कर दी.

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