
IIT से बीटेक, ₹120 करोड़ की फंडिंग, फिर भी सेविंग्स नहीं... CEO ने बताया- रहती है रेंट की टेंशन!
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हर्ष पोखरन ने साल 2010-14 में IIT कानपुर से मेकेनिकल इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (B.Tech) किया है. हर्ष ने अपनी पोस्ट में बताया कि उन्होंने साल 2019 में कंपनी ने 120 करोड़ रुपये की फंडिंग जुटाई थी, लेकिन इसके बाद भी उनके पास कोई सेविंग्स नहीं है, रेंट को लेकर परेशान रहते हैं और कॉलेज के बच्चों की तरह रह रहे हैं.
IIT से पढ़ाई के बाद स्टार्टअप के लिए करोड़ों की फंडिंग के बाद भी पैसों की तंगी झेल रहे हर्ष पोखरन की एक पोस्ट सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है. OkCredit के CEO और को-फाउंडर ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट शेयर की है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर स्टार्टअप्स को लेकर नई बहस शुरू हो गई है.
हर्ष पोखरन ने साल 2010-14 में IIT कानपुर से मेकेनिकल इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (B.Tech) किया है. Flipkart में ट्रेनी और जियोमनी में एंड्रॉयड इंजीनियर रह चुके हैं. उन्होंने कई स्टार्टअप शुरू किए जिसमें से कई फेल हो गए. फिलहाल OkCredit के को-फाउंडर और CEO हैं.
120 करोड़ रुपये की फंडिंग, फिर भी पैसों की तंगी हर्ष ने अपनी पोस्ट में बताया कि उन्होंने साल 2019 में कंपनी ने 120 करोड़ रुपये की फंडिंग जुटाई थी, लेकिन इसके बाद भी उनके पास कोई सेविंग्स नहीं है, रेंट को लेकर परेशान रहते हैं और कॉलेज के बच्चों की तरह रह रहे हैं. उन्होंने बताया कि वो ऐसे अकेले नहीं हैं, कई स्टार्टअप हैं जो करोड़ों की फंडिंग उठाने के बावजूद पैसों की तंगी झेलनी पड़ती है, उन्हें कोई फायदा नहीं होता. यहां तक कि किराया भरने में भी दिक्कत होती है.
फाउंडर्स की गरीबी की वजह हर्ष ने अपनी पोस्ट में वेंचर कैपिटलिस्ट्स (VCs) को इसकी बड़ी वजह बताया है. उन्होंने कहा कि क्योंकि VCs चाहते हैं कि फाउंडर गरीब ही रहें. पैसे वाला फाउंडर खतरनाक हो जाता है, इतना खतरनाक कि वह ना कह दे, इतना खतरनाक कि वह दूर चला जाए, इतना खतरनाक कि वह अपनी शर्तों पर फैसले ले. उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से हताश फाउंडर्स को कंट्रोल करना आसान है. अगर कोई फाउंडर अपने लोन को चुकाने के लिए थोड़ा कैश मांगने की हिम्मत करता है, तो उसे किनारे कर दिया जाता है.
फाइनेंशियल सिक्योरिटी फाउंडर्स को कमजोर नहीं, निडर बनाती है: हर्ष हर्ष ने अपनी पोस्ट में लिखा कि VCs को सीरियल फाउंडर्स पर लाखों खर्च करने में कोई परेशानी नहीं होती जिनके पास बीच हाउस और रिटायरमेंट फंड होते हैं. जाहिर है, पैसा केवल इच्छाओं को मारता है जब यह आपके हाथों में होता है, उनके हाथों में नहीं. सच तो यह है - थोड़ी फाइनेंशियल सिक्योरिटी फाउंडर्स को कमजोर नहीं बनाती, यह उन्हें निडर बनाती है. इसलिए अगर आप फाउंडर हैं, तो किसी को भी आपको गरीब रहने के लिए शर्मिंदा न करने दें. अपने सपने को साकार करें. लेकिन अपनी स्वतंत्रता को भी बनाए रखें.
यूजर्स ने दिए ऐसे रिएक्शन्स हर्ष की पोस्ट के बाद यूजर्स अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा, 'क्या सीईओ सच में गरीब होते हैं? शायद फाउंडर्स को बातचीत की कला भी सीखनी चाहिए.' दूसरे यूजर ने लिखा, 'हर्ष, आप जिंदगी के सबक शेयर करते हैं, जो लोग मुश्किलों में सीखते हैं. हमेशा मुस्कुराते रहें.' एक ने लिखा, 'यह पोस्ट बहुत सच्ची है! फाउंडर की मुश्किलें, आर्थिक दबाव और सपने बनाने की जद्दोजहद को बयां करती है, हर्ष, बढ़ते रहें!' एक यूजर ने लिखा है कि फाइनेंशियल सिक्योरिटी से इच्छा नहीं बल्कि डर खत्म होता है और यही वह पार्ट है जिसके बारे में कोई बात नहीं करता.

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