
Ground Report: युद्ध ने बस्ते की जगह कंधे पर लाद दी जिम्मेदारी, लेबनान में मजदूरी को मजबूर बच्चे
AajTak
लेबनान में युद्ध के बीच बच्चे बाल मजदूरी को मजबूर हैं. युद्ध के बीच लाखों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है और शहरी इलाकों और सीमाई इलाकों में शरण लेना पड़ा है और कई देश छोड़कर भाग रहे हैं. इस बीच सीरिया की सीमाई इलाकों में पहुंचे आजतक के पत्रकार अशरफ वानी ने पाया कि किस तरह जंग बाल मजदूरी को जन्म देती है.
गाजा के बाद लेबनान में इजरायली युद्ध ने बच्चों को बाल मजदूरी में धकेल दिया है. दुनियाभर में जहां बाल मजदूरी के खिलाफ वैश्विक संस्थाएं अभियान चला रही हैं, तो वहीं इन युद्धग्रस्त देशों में बच्चे मजदूरी करने को मजबूर हैं. आजतक युद्धग्रस्त लेबनान और सीरिया की सीमाई इलाकों में पहुंचा, जहां पाया कि जिन बच्चों के कंधों पर बस्ते होने चाहिए उनके कंधों पर अब जिम्मेदारी आ गई है.
लेबनान से सीरिया जाने वाली सीमा पर पहुंची आजतक की टीम ने यहां बच्चों से भी बात की, और यह जानने की कोशिश की कि आखिर इस युद्ध के बीच वे क्या कर रहे हैं. उनके साथ मौजूद एक शख्स ने सभी का परिचय कराया और बताया कि वे वहां मजदूरी में लगे हैं. वे सभी लेबनानी हैं और युद्ध के बाद पैदा होने वाली चाइल्ड लेबर समस्या के शिकार हैं.
यह भी पढ़ें: लेबनान में ग्राउंड अटैक के पीछे क्या है नेतन्याहू का मकसद? जानें- हिज्बुल्लाह को लिटानी नदी के पार क्यों खदेड़ना चाहता है इजरायल
इजरायल का लेबनान को लेकर क्या प्लान है?
इजरायल ने लेबनान में हिज्बुल्लाह के प्रमुख हसन नसरल्लाह की मौत के बाद ग्राउंड अटैक शुरू कर दिया है. इजरायली सेना टैंकों और भारी हथियारों के साथ लेबनान में घुस गई है. पीएम नेतन्याहू का प्लान है कि उन्हें इजरायल की सीमाओं से पीछे हटाने की है, जिससे उन्हें उम्मीद है कि शांति कायम होगी. नेतन्याहू ने पहले ही अपने एक बयान में कहा था कि वह नॉर्दर्न क्षेत्र में शांति चाहते हैं और वह अपनी इसी योजना के साथ लेबनान में सेना भेज दी है.
यह भी पढ़ें: 'लेबनान के पेजर्स की तरह ईरान में iPhone ब्लास्ट का खतरा...', इजरायली हमलों के बीच सांसद ने चेताया

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.









