
'मुझे किसी इंटरनेशनल कानून की जरूरत नहीं', दुनिया के सरपंचों को ट्रंप का पंच… अवज्ञा, अवमानना और उपहास के 1 साल!
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले से स्थापित वर्ल्ड ऑर्डर में हलचल ला दी. ट्रंप के शासन के गुजरे एक वर्ष वैश्किल उथल-पुथल के रहे. 'अमेरिका फर्स्ट' के उन्माद पर सवाल राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ का हंटर चलाकर कनाडा, मैक्सिको, चीन, भारत की अर्थव्यवस्था को परीक्षा में डाल दिया. जब तक इकोनॉमी संभल रही थी तब तक ट्रंप ने ईरान और वेनेजुएला में अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर दुनिया को स्तब्ध कर दिया.
'अमेरिका फर्स्ट' के नाम पर खुद में मगन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में तमीज और तहजीब की धज्जियां उड़ा दी. वैश्विक नेताओं और संस्थाओं को ऐसी चुनौतियां दीं कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति हिल गई. अमेरिका संप्रुभता का उदंड प्रदर्शन करते हुए ट्रंप ने एक नहीं कई बार दुनिया के 'सरपंचों' के मुंह पर अवज्ञा, अवमानना और उपहास का 'पंच' मारा.
आठ जनवरी 2026 को ट्रंप ने न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में अमेरिकी सीनाजोरी की सीमा को लगभग परिभाषित करते हुए कहा, 'मुझे किसी अंतर्राष्ट्रीय कानून की जरूरत नहीं है, मेरी शक्ति की सीमाएं केवल मेरी नैतिकता है.'
20 जनवरी 2025 को सत्ता में आने के बाद ट्रंप ने अमेरिकी विदेश नीति को मनमाने ढंग से परिभाषित करना शुरू कर दिया. ट्रंप के इन कदमों के आगे संयुक्त राष्ट्र, अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय, जी-20 जैसी संस्थाएं अपना पसीना पोंछ रही हैं. ये संस्थाएं, जो खुद को विश्व शांति और कानून-व्यवस्था का रखवाला मानती थीं, ट्रंप 2.0 के हाथों बेनकाब या बेबस हो गईं.
राष्ट्रपति के बेडरूम में आर्मी भेजने वाला सनकी
तीन जनवरी को जब ट्रंप ने कहा कि आधी रात को एक ऑपरेशन में वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को अमेरिकी सैनिकों ने उठवा लिया है तो दुनिया हैरान रह गई. गौरतलब है कि उस वक्त निकोलस मादुरो अपने बेडरूम में थे. ट्रंप ने इन दोनों नारको-टेररिज्म और ड्रग ट्रैफिकिंग का आरोप बताया.
ट्रंप ने अपने पोस्ट में कहा कि, "Last night and early today, at my direction, the United States armed forces conducted an extraordinary military operation in the capital of Venezuela."

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