
DNA ANALYSIS: बंगाल की विलुप्त होती 250 साल पुरानी जनजाति की कहानी, पढ़ें ये ग्राउंड रिपोर्ट
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West Bengal: पश्चिम बंगाल और असम को जोड़ने वाले राजमार्ग से 21 किमी अंदर बसे गांव की तरफ न कोई सड़क जाती है और न ही यहां यातायात की कोई व्यवस्था है. टोटोपाड़ा जाने के रास्ते में 4 बरसाती नदियां भी आती हैं, जिस पर कोई पुल नहीं है.
नई दिल्ली: प्रसिद्ध समाज सुधारक और विचारक पंडित दीन दयाल उपाध्याय ने कहा था कि 'जब तक अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति का उदय नहीं होगा, तब तक भारत का उदय संभव नहीं है'. यानी देश के विकास को तभी सफल माना जाएगा जब समाज के आखिरी तबके तक उसका लाभ पहुंचेगा, लेकिन आज हम आपको बताएंगे कि हमारे देश में क्या ऐसा होता है? इसके लिए हम आपको एक ऐसे सीमावर्ती गांव में लेकर चलेंगे. जहां के लोगों को आप समाज की आखिरी पंक्ति कह सकते हैं. टोटोपाड़ा नाम के इस गांव में विश्व की लुप्तप्राय आदिवासी जनजाति रहती है और इस जनजाति का नाम है टोटो. इस जनजाति के अब 1600 लोग ही अब वहां बचे हैं. 250 साल पहले से भी ज्यादा समय से ये जनजाति इस गांव में बसी हुई है, लेकिन आज तक यहां पहुंचने के लिए उन्हें एक अच्छी सड़क तक नहीं मिली है.
Ice Breaker missile: भारतीय नौसेना अब अपने बेड़े को और भी ज्यादा खतरनाक बनाने के लिए एक ऐसे मिसाइल सिस्टम पर विचार कर रही है, जो समंदर के बीचों-बीच दुश्मन के होश उड़ा देगा. खबर आ रही है कि भारतीय नौसेना अपने MH-60R सीहॉक हेलीकॉप्टरों को इजरायल की आधुनिक 'आइस ब्रेकर' मिसाइल से लैस करने की योजना बना रही है. खास बात यह है कि भारतीय वायुसेना पहले ही इस मिसाइल को अपनी ताकत में शामिल करने की मंजूरी दे चुकी है.

Line Replaceable Units: RVAS ने भारत के स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. कंपनी अब तेजस Mk-2 के लिए एक महत्वपूर्ण Line Replaceable Unit के विकास में भागीदार बन गई है. तेजस Mk-2 को भारतीय वायुसेना के भविष्य के बेड़े की रीढ़ माना जा रहा है. तेजस Mk-2 एक मीडियम-वेट, सिंगल इंजन, मल्टी-रोल फाइटर जेट होगा. इसमें नया एयरफ्रेम, ज्यादा ताकतवर इंजन, आधुनिक एवियोनिक्स, स्वदेशी AESA रडार और ज्यादा हथियार ले जाने की क्षमता होगी.

Pakistani Leader Chief Guest in 1955 republic day: यह किस्सा है साल 1955 का. उस समय भारत ने पाकिस्तान के तत्कालीन गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था. उस दौर में भारत अपनी लोकतांत्रिक संस्थाओं और परंपराओं को आकार दे रहा था. मलिक गुलाम मोहम्मद का भारत से पुराना जुड़ाव भी रहा था. उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी.










