
CrPC Section 193: जब सेशन कोर्ट लेती है अपराध का संज्ञान, तो लागू होती है ये धारा
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सीआरपीसी की धारा 193 के तहत अपराधों का सेशन न्यायालयों द्वारा संज्ञान लिए जाने का प्रावधान किया गया है. आइए जानते हैं कि सीआरपीसी (CrPC) की धारा 193 इस बारे में क्या जानकारी देती है?
Code of Criminal Procedure: दंड प्रक्रिया संहिता में कोर्ट (Court) और पुलिस (Police) की कार्य प्रणाली के लिए कई तरह के कानूनी प्रावधान (Legal provision) किए गए हैं. ऐसे ही सीआरपीसी की धारा 193 के तहत अपराधों का सेशन न्यायालयों द्वारा संज्ञान लिए जाने का प्रावधान किया गया है. आइए जानते हैं कि सीआरपीसी (CrPC) की धारा 193 इस बारे में क्या जानकारी देती है? सीआरपीसी की धारा 193 (CrPC Section 193) दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure 1975) की धारा 193 में अपराधों का सेशन न्यायालयों द्वारा संज्ञान लिया जाना परिभाषित किया गया है. CrPC की धारा 193 के मुताबिक, इस संहिता द्वारा या तत्समय प्रवृत्त (for the time being in force) किसी अन्य विधि द्वारा अभिव्यक्त (expressed by law) रूप से जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, कोई सेशन न्यायालय (Session Court) आरंभिक अधिकारिता वाले न्यायालय (Court) के रूप में किसी अपराध का संज्ञान (Cognizance of offense) तब तक नहीं करेगा जब तक मामला इस संहिता के अधीन मजिस्ट्रेट (Magistrate) द्वारा उसके सुपुर्द नहीं कर दिया गया है.
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क्या है दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 (Code of Criminal Procedure, 1973) भारत में आपराधिक कानून के क्रियान्यवन के लिये मुख्य कानून है. यह सन् 1973 में पारित हुआ था. इसे देश में 1 अप्रैल 1974 को लागू किया गया. दंड प्रक्रिया संहिता का संक्षिप्त नाम 'सीआरपीसी' है. सीआरपीसी (CRPC) अंग्रेजी का शब्द है. जिसकी फुल फॉर्म Code of Criminal Procedure (कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर) होती है. इसे हिंदी में 'दंड प्रक्रिया संहिता' कहा जाता है. CrPC में 37 अध्याय (Chapter) हैं, जिनके अधीन कुल 484 धाराएं (Sections) मौजूद हैं. जब कोई अपराध होता है, तो हमेशा दो प्रक्रियाएं होती हैं, एक तो पुलिस अपराध (Crime) की जांच करने में अपनाती है, जो पीड़ित (Victim) से संबंधित होती है और दूसरी प्रक्रिया आरोपी (Accused) के संबंध में होती है. सीआरपीसी (CrPC) में इन प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है. CrPC में अब तक कई बार संशोधन (Amendment) भी किए जा चुके हैं.

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