
Budh Rashi Parivartan 2025: भाई दूज के बाद बुध का राशि परिवर्तन, इन 3 राशियों पर होगी धनवर्षा
AajTak
24 अक्टूबर को ग्रहों के राजकुमार बुध का गोचर होने वाला है. इस दिन बुध वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे. ज्योतिषविदों का कहना है कि वृश्चिक राशि मेें बुध का गोचर तीन राशि के जातकों को भाग्यशाली बना सकता है.
Budh Rashi Parivartan 2025: 23 अक्टूबर को भाई दूज है और इसके अगले दिन यानी 24 अक्टूबर को बुध ग्रह का राशि परिवर्तन होने वाला है. इस दिन बुध तुला राशि से निकलकर वृश्चिक राशि में गोचर करने वाला है. ज्योतिष शास्त्र में बुध को ग्रहों का राजकुमार गया है, क्योंकि यह बुद्धि, वाणी, तर्क, व्यापार और संचार का कारक ग्रह माना जाता है. ज्योतिषविदों का कहना है कि वृश्चिक राशि में आने के बाद बुध तीन राशि के जातकों को भाग्यशाली बना सकता है.
कर्क राशि (Kark Rashi) कर्क राशि के जातको के लिए यह समय बेहद शुभ माना जा रहा है. कारोबार में तरक्की और आर्थिक मोर्चे पर लाभ के योग बन रहे हैं. करियर में नई उपलब्धियां मिल सकती हैं और आपकी बातों का प्रभाव लोगों पर दिखेगा. विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को मनचाही सफलता मिल सकती है. विदेश में पढ़ाई, बसने या नौकरी करने का सपना भी इस दौरान साकार हो सकता है.
कन्या राशि (Kanya Rashi) कन्या राशि के जातकों के लिए भी बुध का यह गोचर शुभ संकेत दे रहा है. नए लोगों से मुलाकात आपके व्यापार में फायदे का कारण बन सकती है. संवाद कौशल रिश्तों को मजबूत बनाएगा. संपत्ति खरीदने का मन बना रहे हैं तो इससे अच्छा समय नहीं मिलेगा. आर्थिक स्थिति बेहतर होगी और भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि संभव है. कहीं से रुका हुआ या फंसा हुआ धन भी वापस आ सकता है.
धनु राशि (Dhanu Rashi) धनु राशि वालों के लिए बुध का यह राशि परिवर्तन उन्नति के द्वार खोल सकता है. नौकरीपेशा जातकों को उन्नति के नए अवसर मिलेंगे. व्यापारी वर्ग को बड़ा मुनाफा हो सकता है. कला, मीडिया या रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों को नाम और सम्मान मिलेगा. पैतृक संपत्ति से जुड़ा कोई विवाद सुलझ सकता है. पत्नी के सहयोग से कोई कार्य संपन्न होगा. भाग्य का साथ मिलेगा.

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












