
331 रनों की आंधी... जब सचिन-द्रविड़ ने कीवियों पर घंटों तक किया प्रहार, रच डाला इतिहास
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8 नवंबर 1999 को हैदराबाद के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में भारतीय क्रिकेट इतिहास का एक यादगार दिन दर्ज हुआ. न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज के दूसरे वनडे में सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ ने बल्ले से ऐसा तूफान मचाया कि क्रिकेट इतिहास में नया अध्याय लिख दिया.
भारतीय क्रिकेट के गौरवशाली इतिहास में 8 नवंबर 1999 का दिन किसी त्योहार से कम नहीं था. हैदराबाद के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ ने मिलकर जो किया, वह आज भी क्रिकेट के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज है. यह वही मैच था, जिसमें भारतीय बल्लेबाजों ने न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर ऐसा कहर बरपाया कि क्रिकेट के रिकॉर्ड बुक तक हिल गई.
तीन दिन पहले राजकोट में खेले गए सरीज के पहले वनडे में न्यूजीलैंड ने अपना तब तक का सर्वोच्च वनडे स्कोर (349 रन) बनाकर भारत को हरा दिया था. भारतीय टीम के सामने चुनौती साफ थी या तो जवाब दो, या सिर झुका लो. लेकिन कप्तान सचिन तेंदुलकर की अगुआई में टीम इंडिया ने जवाब ऐसा दिया कि इतिहास बन गया.
हैदराबाद की फ्लैट पिच और बिजली जैसी तेज आउटफील्ड पर भारत ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी चुनी और फिर शुरू हुआ वह महाकाव्य, जो आने वाले वर्षों तक मिसाल बना रहा.
सचिन-द्रविड़ का बल्ले से संग्राम
सौरव गांगुली दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से रन आउट हुए. गेंदबाज शेन ओ’कॉनर की फॉलो-थ्रू से लगी गेंद सीधी नॉन-स्ट्राइकर छोर के स्टंप्स से टकराई, और गांगुली क्रीज से बाहर थे. इसके बाद मैदान पर उतरे राहुल द्रविड़ और फिर शुरू हुआ एक ऐसा प्रदर्शन, जिसने वनडे क्रिकेट के मापदंड ही बदल दिए.
तेंदुलकर और द्रविड़ की जोड़ी ने 46.2 ओवरों तक न्यूजीलैंड के गेंदबाजों को रौंदे रखा. दोनों ने मिलकर 331 रनों की साझेदारी की, जो उस समय की किसी भी विकेट के लिए विश्व रिकॉर्ड पार्टनरशिप रही.

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