
11 दिन तक चले युद्ध के बाद इज़रायल और हमास के बीच संघर्ष विराम पर बनी सहमति
The Wire
इस 11 दिन के ख़ूनी संघर्ष में ग़ाज़ा पट्टी में बड़े पैमाने पर बर्बादी हुई, इज़रायल के अधिकांश हिस्सों में जीवन थम गया था और दोनों तरफ के 200 से अधिक लोगों की जानें गईं. 19 मई तक इस संघर्ष में 208 फ़लस्तीनियों की मौत हो चुकी है, जिनमें क़रीब 60 बच्चे शामिल हैं. वहीं इज़रायल में भी दो बच्चों सहित 12 लोगों की जान गई है.
वॉशिंगटन/संयुक्त राष्ट्र: इजरायल और हमास के बीच बृहस्पतिवार को संघर्ष विराम पर सहमति बनी, जिसके बाद 11 दिन तक चले निर्मम युद्ध पर विराम लग गया. इस 11 दिन के खूनी संघर्ष में गाजा पट्टी में बड़े पैमाने पर बर्बादी हुई, इजरायल के अधिकांश हिस्सों में जीवन थम गया था और 200 से अधिक लोगों की जानें गईं. 19 मई तक इस संघर्ष में 208 फलस्तीनियों की मौत हो चुकी है, जिनमें करीब 60 बच्चे शामिल हैं. वहीं इजरायल में भी दो बच्चों सहित 12 लोगों की जान गई है. स्थानीय समयानुसार, बृहस्पतिवार देर रात दो बजे जैसे ही संघर्ष विराम प्रभावी हुआ, गाजा की सड़कों पर जोशपूर्ण माहौल देखने को मिला. लोग घरों से बाहर आ गए, कुछ जोर-जोर से ‘अल्लाहू अकबर’ बोलने लगे या अपनी बालकनी से सीटी बजाने लगे. कई लोगों ने हवा में गोलियां चलाईं और इस विराम पर जश्न मनाया.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीयर स्टारमर ईरान के साथ युद्ध को लेकर अलग-अलग रुख पर खड़े दिखाई दे रहे हैं. ब्रिटिश टैब्लॉयड द सन को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका-ब्रिटेन सबसे मजबूत रिश्तों में से एक था. यह देखकर दुख होता है कि यह रिश्ता अब पहले जैसा नहीं रहा.

अमेरिका और इज़रायल के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की हत्या की भारत के विपक्षी दलों ने कड़ी निंदा की है. विपक्ष ने केंद्र सरकार की विदेश नीति की भी आलोचना करते हुए कहा कि लंबे समय से ‘मित्र’ रहे ईरान पर थोपे गए युद्ध को लेकर सरकार की प्रतिक्रिया भारत के मूल्यों, सिद्धांतों और हितों के साथ ‘विश्वासघात’ है.






