
हरियाणा-राजस्थान में एक्टिव गोरक्षकों को सरकार क्या रिकॉगनाइज करती है? जानिए बड़े विवाद
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हरियाणा में गोतस्करी के शक में एक स्टूडेंट की गोली मारकर हत्या कर दी गई है. इस घटना से लोगों में नाराजगी है. इस मामले में पुलिस का कहना है कि वो लोग (आरोपी) सड़क के किनारे खड़े थे. उन्हें शक हुआ कि कार से कोई अपराधी जा रहे हैं. इस पर उन्होंने पीछा किया और गोली चला दी.
हरियाणा के फरीदाबाद में गो-तस्करी के शक में 12वीं कक्षा के छात्र आर्यन मिश्रा (19 साल) की गोली मारकर हत्या कर दी गई है. पुलिस ने मामले में 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. हमलावर ने खुद स्वीकार किया है कि उसने गोतस्कर समझकर गोली चलाई है. घटना को लेकर पुलिस से लेकर प्रशासन तक पर सवाल उठ रहे हैं. इस बीच, आर्यन के पिता सियानंद मिश्रा ने सवाल पूछा, गोतस्करी के शक में किसी को गोली मारने का अधिकार किसने दिया है? अगर मोदी सरकार ने ऐसा अधिकार दिया है तो क्यों? हालांकि, पुलिस ने आधिकारिक तौर पर आरोपियों को गोरक्षक नहीं बताया है. सवाल उठ रहा है कि क्या सरकारें एक्टिव गोरक्षकों को रिकॉगनाइज करती हैं? जानिए हरियाणा-राजस्थान में गौतस्करी से जुड़े बड़े विवाद...
राजस्थान और हरियाणा में गोरक्षा को लेकर कड़े कानून बनाए गए हैं, जिसमें गोहत्या और गोतस्करी के खिलाफ कठोर दंड का प्रावधान है. इन कानूनों का हवाला देकर अक्सर गोरक्षक समूह अपनी गतिविधियों को सही ठहराते हैं. हालांकि, विवाद सामने आने पर इन समूहों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है.
केस नंबर-1. छात्र को गौतस्कर समझकर गोली मार दी
पहले जानिए हरियाणा के पलवल में क्या हुआ है? मामला 23-24 अगस्त की दरमियानी रात का है. आर्यन मिश्रा 12वीं का छात्र था और फरीदाबाद का रहने वाला था. आर्यन समेत पांच लोग कार में सवार थे और कहीं जा रहे थे. आरोप है कि रात दो बजे कथित गो-रक्षकों ने कार को जाते देखा तो पीछा किया और गो-तस्करी के शक में आर्यन की मारकर हत्या कर दी. मामले में पुलिस ने सभी 5 आरोपियों सौरभ, अनिल कौशिक, वरुण, कृष्ण और आदेश को गिरफ्तार कर लिया है. पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि 23 अगस्त की रात उन्हें सूचना मिली थी कि दो एसयूवी सवार कुछ संदिग्ध मवेशी तस्कर शहर में रेकी कर रहे हैं. उन्होंने आर्यन मिश्रा और उसके दोस्तों शैंकी और हर्षित को मवेशी तस्कर समझा और दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर गढ़पुरी टोल के पास करीब 30 किलोमीटर तक उनकी कार का पीछा किया. जब उन्होंने कार रोकने को कहा तो चालक ने स्पीड बढ़ा दी, जिसके बाद उन्होंने गोलियां चला दीं और आर्यन की पलवल में गढ़पुरी टोल के पास मौके पर ही मौत हो गई. पुलिस ने अपराध में इस्तेमाल अवैध हथियार और कार बरामद कर ली है. पुलिस इस मामले में आरोपियों को गो-रक्षक मानने से इनकार कर रही है. पुलिस ने आरोपियों और आर्यन के बीच आपसी रंजिश से भी इनकार किया है.
आर्यन मिश्रा के पिता सियानंद मिश्रा ने आजतक से कहा, आरोपी अनिल कौशिक को पुलिस ने पकड़ा है. जब अनिल से हमने बात की तो उसका कहना था कि उसने मुसलमान समझ कर गोली मारी है. उससे गलती से गोली चल गई है. वो गोतस्कर समझकर गोली चला रहा था. पिता का कहना था कि जब मैंने उससे पूछा कि उसने पास जाकर दूसरी गोली क्यों मारी तो उसने कोई जवाब नहीं दिया. अनिल से यह भी पूछा कि सिर्फ आर्यन को ही गोली क्यों लगी? जबकि कार में कहीं गोली लगने का निशान नहीं है? जब एक गोली आर्यन को लग गई तो दूसरी गोली पास में जाकर क्यों मारी गई?
वहीं, पुलिस का कहना है कि वो लोग (आरोपी) सड़क के किनारे खड़े थे. उन्हें शक हुआ कि कार से कोई अपराधी जा रहे हैं. इस पर उन्होंने पीछा किया और गोली चला दी. पिता का कहना था कि 31 डी इलाके से करीब 30 किमी दूर पलवल तक लगातार गोली चलाई गई. मेरे बेटे को सिर और कंधे पर गोली लगी. मुझे इस सवाल का जवाब चाहिए कि दूसरी गोली करीब जाकर क्यों मारी गई है? हर्षित गुलाटी समेत अन्य लोगों (ये सभी आर्यन के साथ कार में सवार थे) ने पुलिस को गुमराह किया और बताया कि एक नंबर मैन मार्केट में रहने वाले लोगों ने गोली मारी है. उस रात करीब एक बजे हर्षित की मां का कॉल आया और बेटे से बात हुई. बेटा घर से चला गया. रात तीन बजे मुझे फोन आया कि तुम्हारे बेटे को गोली मार दी गई. घटना के बाद जब मैं अस्पताल पहुंचा तो वहां पर सभी लोग मिले. सुझाता के शरीर पर खून लगा हुआ था.

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