
सोशल मीडिया पर कंपनियां क्यों मांग रही हैं लोगों से माफी? वायरल हुआ ये ट्रेंड
AajTak
सोशल मीडिया ओपन करते ही आपको कई कंपनियों का 'माफी-नामा' दिख जाएगा. दरअसल, कंपनियां मांफी मांग रही है, लेकिन किस वजह से. ये माफी कंपनियां अपने अच्छे प्रोडक्ट्स के लिए मांग रही हैं, जिनकी वजह से लोगों को परेशानी नहीं हो रही है. ये सब कुछ वायरल अपॉलिजी ट्रेंड का हिस्सा है. आइए जानते हैं क्या है ये ट्रेंड और क्यों हर कोई इसकी बात कर रहा है.
सोशल मीडिया पर कोई चीज पॉपुलर हो, तो लोग उसे ट्रेंड बना देते हैं. कभी ये रील के साथ होता है, तो कभी किसी मीम के साथ. इस बार कंपनियों ने एक ट्रेंड बना दिया है, जो सॉरी से जुड़ा है. दरअसल, तमाम कंपनियां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सॉरी या अपॉलिजी पोस्ट कर रहे हैं, जो वास्तव में अपॉलिजी है नहीं.
ब्रांड्स ने मजाक के जरिए लोगों से कनेक्ट होने का एक नया तरीका खोजा है. सोशल मीडिया पर हर तरफ आपको Official Apology Trend देखने को मिलेगा. कंपनियां अच्छा होने के लिए लोगों से माफी मांग रही हैं. क्योंकि उनकी वजह से लोगों के बहाने काम नहीं करेंगे.
ये वायरल ट्रेंड अपने ब्रांड को प्रमोट करने का एक तरीका है, जिसमें कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स के अच्छे होने के लिए कंज्यूमर्स से माफी मांग रही है. ब्रांड्स इसके लिए असली दिखने वाले अपॉलिजी लेटर पोस्ट कर रहे हैं. इस पोस्ट में मजा है, जो कंपनियों को ये दिखाने का मौका दे रहा है कि वे किस काम में एक्सपर्ट हैं. जियो ने अपने यूथ ऑफर को लेकर अपॉलिजी ट्रेंड में पोस्ट किया है.
यह भी पढ़ें: भारत में लॉन्च होने वाला है 200MP कैमरे वाला खास फोन, कंपनी ने निकाला 99 रुपये का ऑफर
इस ट्रेंड में एक दो नहीं बल्कि तमाम बड़े ब्रांड्स शामिल हैं. फॉक्सवैगन इंडिया, स्कॉडा, टी-सीरीज, Keventers और डाबर समेत तमाम ब्रांड्स इस तरह के पोस्ट सोशल मीडिया पर डाल रहे हैं. स्कॉडा इंडिया ने लोगों से मजाकिया अंदाज में इसलिए माफी मांग रही है.
कंपनी ने लिखा है कि उनकी कार्स इतनी अच्छी हैं कि लोग लॉन्ग ड्राइव से खुद को रोक नहीं पाते हैं. वहीं फॉक्सवैगन ऐसे कार बनाने के लिए 'माफी' मांग रहा है, जिनसे दूर रहना बहुत कठिन है. दरअसल, इस तरह के पोस्ट के जरिए कंपनियां कस्टमर्स से इमोशनली कनेक्ट करने की कोशिश कर रही हैं.

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












