
सर्जन बनना चाहते थे बशर अल-असद, पिता-भाई की मौत ने कराई सियासत में एंट्री, 24 साल बाद खत्म हुआ शासन
AajTak
बशर अल-असद अपने परिवार के साथ सीरिया छोड़कर रूस भाग चुके हैं. सीरिया पर अब विद्रोही गुटों ने कब्जा कर लिया है. देश में इस समय गृहयुद्ध जैसे हालात बन गए हैं. शिया मुस्लिम परिवार में जन्मे बशर अल-असद अपने पिता की तीसरी संतान हैं.
सीरिया में तख्तापलट हो चुका है. राष्ट्रपति बशर अल-असद अपने पूरे परिवार के साथ देश छोड़कर रूस भाग गए हैं. देश में इस समय गृहयुद्ध जैसे हालात बन गए हैं. अलग-अलग हिस्सों में विद्रोहियों के कई गुटों ने कब्जा कर लिया है. इस बीच बशर अल-असद और उनके पारिवारिक बैकग्राउंड को लेकर सोशल मीडिया पर बातें की जा रही है तो आइए आपको बताते हैं कि आखिर बशर अल-असद हैं कौन और उनका परिवार कब से सीरिया की सत्ता पर काबिज है.
बशर-अल-असद सीरिया के सैन्य अधिकारी और बाथ पार्टी के मेंबर हाफिज अल-असद की तीसरी संतान हैं. असद परिवार सीरिया के अलावी अल्पसंख्यक समुदाय से ताल्लुक रखता है, जो मुस्लिम (शिया) धर्म का एक छोटा सा संप्रदाय है. सीरिया में अलावी समुदाय की आबादी करीब 10 फीसदी है. असद का परिवार 1960 से सीरिया की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभाता आया है. असद के पिता हाफिज अल-असद 1971 में तख्तापलट कर सीरिया के राष्ट्रपति बने थे.
बड़े भाई की मौत के बाद बने उत्तराधिकारी
ब्रिटानिका के मुताबिक बशर अल-असद का जन्म सीरिया की राजधानी दमिश्क में 11 सितंबर, 1965 में हुआ था. उन्होंने शुरुआती पढ़ाई दमिश्क की. दमिश्क यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई करने के बाद असद ने 1988 में नेत्र रोग विशेषज्ञ के तौर पर में अपना ग्रेजुएशन किया. ग्रेजुएट होते ही वह दमिश्क के एक सैन्य अस्पताल में मिलिट्री डॉक्टर बन गए. हालांकि, 1992 में असद आगे की बढ़ाई के लिए लंदन चले गए. इस बीच असद के पिता हाफिज अल-असद ने अपने बड़े बेटे बेसिल को उत्तराधिकारी घोषित कर दिया. हालांकि, सत्ता पर हाफिज की काबिज रहे. एक कार एक्सीडेंट में 1994 में बेसिल की मौत हो गई.
सत्ता सौंपने से पहले दी गई मिलिट्री ट्रेनिंग
सियासत और सैन्य अनुभव की कमी के बावजूद बशर को सीरिया बुला लिया गया. यहां उन्हें सीरिया को आगे संभालने के लिए मनाया जाने लगा. बशर की ताकत बढ़ाने के लिए उन्हें एक सैन्य अकादमी में ट्रेनिंग दी गई, जिसके बाद उन्हें कर्नल रैंक दी गई. बशर को सियासत में बिल्कुल रुचि नहीं थी. इसलिए उनकी इमेज बनाने के लिए पिता हाफिज ने कई कोशिशें कीं. बशर को सोची-समझी प्लानिंग के मुताबिक भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का प्रमुख बनाया गया. बशर ने इस दौरान कई बड़े अधिकारियों को पद से हटा दिया. उन्हें सीरियाई कम्प्यूटर सोसाइटी का अध्यक्ष भी बना दिया गया, जिससे उनकी छवि तकनीकी को पसंद करने वाले नेता के रूप में सामने आई.

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा. कई टॉप कमांडर्स के मारे जाने के बाद भी ईरान, अमेरिका और इजरायल पर जबरदस्त पलटवार कर रहा है. ट्रंप की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. ना तो ईरान के तेवर कमजोर पड़ रहे और ना ही NATO और दुनिया के तमाम देश ट्रंप का साथ दे रहे. सवाल है क्या ईरान को हराना ट्रंप के लिए 'नाक की लड़ाई' बन गई है? देखें हल्ला बोल.

ईरान ने भी अपनी मिसाइल ताकत को दुनिया के सामने पेश किया है और ईरान ने हिंद महासागर में मौजूद ब्रिटेन के सैन्य बेस पर अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर दो लॉन्ग रेंज मिसाइलों से हमला किया है. हम आपको बता दें कि ईरान से दिएगो गार्सिया की दूरी करीब 4 हजार किलोमीटर है. ईरान ने दिएगो गार्सिया की ओर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागी जिसमे एक को बीच में ही नष्ट करने का दावा किया जा रहा है.











