
सरकारें किसी अटैक को कब मानती हैं आतंकी हमला, और कब नहीं, कितनी तरह का होता है टैरर अटैक?
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सिडनी के एक चर्च में 16 साल के लड़के ने चाकूबाजी करते हुए पादरी समेत 4 लोगों को घायल कर दिया. इससे दो दिनों पहले वहीं के एक मॉल में चाकूबाजी में 6 मौतें हुई थीं. ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने इन हमलों को आतंकी घटना करार दिया. आमतौर पर टैरर अटैक को बंदूकों और बमों से जोड़ा जाता है, लेकिन ऐसा है नहीं. समझिए, कैसे सरकारें किसी हमले को आतंकी हमले की श्रेणी में रखती हैं.
सोमवार को पश्चिमी सिडनी के उपनगर वेकले में लाइव स्ट्रीम के दौरान हुए हमले में असीरियन क्राइस्ट द गुड शेफर्ड चर्च के पादरी समेत चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. घटना के तुरंत बाद भीड़ और पुलिस में झड़प भी हुई. भीड़ का आरोप था कि पुलिस ऐसे हमलों को रोक नहीं पा रही. दूसरी तरफ सिडनी पुलिस ने सीधे कहा कि ये मामूली रंजिश में हुआ अटैक नहीं, बल्कि टैरर अटैक था. हमलावर से शुरुआती पूछताछ के बाद पुलिस ने ये बयान दिया.
किसे कहते हैं आतंकवाद
किसी खास राजनीतिक या धार्मिक मकसद के लिए सरकारों को डराना-धमकाना या हिंसा करना आतंकवाद के दायरे में आता है. सरकार की किसी पॉलिसी का विरोध करने के लिए हिंसा का रास्ता अपनाना भी आतंकवाद है. कई बार ये देखा गया है कि पॉलिटिकल विरोध के नाम पर गुट बनते हैं, जो आगे चलकर हिंसक हो जाते हैं. वे सशस्त्र ट्रेनिंग करने और इस नाम पर सरकार को डराने लगते हैं. तब ऐसा पूरा संगठन की आतंकी संगठन कहलाने लगता है.
क्या है आतंकी हमला टैररिस्ट अटैक या इसकी धमकी में ये भाव होता है कि जनता और सरकारें डरकर कोई न कोई बात मान लें. ये आमतौर पर कोई पॉलिटिकल, धार्मिक या वैचारिक डिमांड होती है. इसी मांग को लेकर हमला किया, या हमले की धमकी दी जाती है. किसी खास पॉलिसी के आधार पर तख्तापलट की धमकी या ऐसी तैयारी भी इसकी के तहत आती है.
इन तरीकों से होते हैं आतंकी हमले

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