
समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य बनने जा रहा उत्तराखंड, जानिए नए कानून से क्या बदल जाएगा?
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प्रस्तावित कॉमन सिविल कोड के प्रारूप में मजहबी कानून गौण और नया एकसमान कानून प्रभावी करने का प्रस्ताव होगा. समान नागरिक कानून में बहुपति या बहुपत्नी यानी पॉलीगैमी को कानूनी रूप से अवैध मानते हुए इस पर रोक लगाई जाएगी.
देश में उत्तराखंड समान नागरिक संहिता की राह पर चलने वाला पहला राज्य बनने जा रहा है. देवभूमि की विधान सभा इस कानून के मसौदे यानी विधेयक पर चर्चा करने को आतुर है. हालांकि कानून के आज की राय में राज्य को ऐसा अधिकार संविधान में नहीं है.लेकिन विधान सभा अपने दायरे में रहकर कितना कर सकती है इसकी लक्ष्मण रेखा भी इसके जरिए तय हो जाएगी. सीएम धामी स्पष्ट कर चुके हैं कि उत्तराखंड में प्रस्तावित यूसीसी का उद्देश्य किसी वर्ग को निशाना बनाना नहीं हैं.
उत्तराखंड सरकार ने 27 मई, 2022 को समान नागरिक संहिता की संभावनाएं तलाश कर इसे तैयार करने के लिए और नागरिकों के सभी निजी मामलों से जुड़े कानूनों की जांच के लिए एक्सपर्ट कमेटी बनाई थी. इस विधेयक को देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड या कॉमन सिविल कोड की बहुचर्चित कल्पना को साकार करने की नींव के पत्थर माना जा रहा है. लेकिन इस पर विधान सभा में चर्चा से पहले ही राजनीतिक और धार्मिक हंगामा होने के आसार लग रहे हैं. यानी 2024 के लोक सभा चुनाव से पहले कानून का ये बड़ा सियासी मुद्दा बन सकता है.
नए कानून से क्या बदलेगा?
इन नए कानून के तहत तलाक सिर्फ कानूनी प्रक्रिया से ही होगा. यानी देश में तलाक़ के सारे धार्मिक तरीके अवैध होंगे. इस्लाम या किसी अन्य मजहब में प्रचलित तीन तलाक तो पहले ही सुप्रीम कोर्ट और फिर संसद से भी अमान्य और दंडनीय अपराध हो गया है.नए कानून की जद में तलाक़ ए हसन और तलाक़ ए अहसन भी आएंगे.यानी तलाक के ये मनमाने और एकतरफा तरीके भी गैरकानूनी माने जाएंगे.
बिना विवाह किए एक साथ रहने यानी लिव इन रिलेशनशिप में बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाने का भी प्रावधान नए दौर के नए कानून में है. लिव इन की जानकारी सरकार को तय प्रक्रिया और तय प्रारूप के तहत देनी होगी. यानी इनके भी रजिस्ट्रेशन का प्रावधान होगा. रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया के तहत ही लिव इन रिलेशन की जानकारी लड़का लड़की के माता पिता के पास भी जाएगी.जानकारी न देने पर सज़ा का प्रावधान भी किया गया है. नए मसौदे में बहुविवाह, हलाला और इद्दत पर रोक लगाने का प्रावधान है. इसके अलावा लड़कियों के विवाह करने की न्यूनतम आयु में भी बदलाव किए जाने के संकेत हैं. इसे बढ़ा कर लड़कों के बराबर यानी 21 साल करने पर तो संशय है लेकिन उम्र इतनी तय की जाएगी ताकि वे विवाह से पहले ग्रेजुएट हो सकें.
सबके लिए शादी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने का प्रावधान होगा. विवाह के रजिस्ट्रेशन के बिना परिवार या दंपति को मिलने वाली किसी भी सरकारी सुविधा यानी ज्वाइंट अकाउंट, साझा संपत्ति आदि का लाभ नही मिलेगा. ग्राम स्तर पर भी विवाह के रजिस्ट्रेशन की सुविधा और सेवा मौजूद होगी. नए कानून के मसौदे में विवाह की तरह ही विवाह विच्छेद यानी तलाक के भी एक समान आधार होंगे. पति-पत्नी दोनो को तलाक के समान आधार उपलब्ध होंगे.तलाक का जो ग्राउंड यानी आधार पति के लिए लागू होगा उसी आधार पर पत्नी भी तलाक लेने के लिए अपना सकेगी.

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