
सऊदी अरब के इस फैसले से दुनिया भर के मुसलमानों को पहुंचेगा फायदा
AajTak
सऊदी अरब सरकार हज को लेकर एक ऐसा फैसला लेने जा रही है, जिससे दुनियाभर के मुसलमानों को फायदा पहुंचेगा. सऊदी अरब सरकार जल्द ही एक ई-प्लेटफॉर्म लॉन्च करने जा रही है, जो जायरीनों की सभी मुश्किलों को चुटकियों में हल कर देगा.
भारत से हर साल काफी तादाद में लोग हज और उमराह करने के लिए सऊदी अरब पहुंचते हैं. ऐसे में सऊदी अरब सरकार जल्द ही भारत समेत दुनियाभर से हज पर जाने वाले जायरीनों को लेकर बड़ा कदम उठाने जा रही है. सऊदी सरकार के इस कदम से हज पर आने की चाहत रखने वाले दुनियाभर के करोड़ों लोगों को फायदा पहुंचेगा.
दरअसल, सरकार अब हज के लिए एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म लॉन्च करने जा रही है. सऊदी अरब सरकार के इस कदम का लाभ ना सिर्फ हज बल्कि उमराह पर आने वाले लोगों को भी पूरी तरह से मिलेगा. सऊदी अरब सरकार की इस ऑनलाइन सुविधा के जरिए भारत समेत दूसरे देशों से जाने वाले लोग आराम से हज के लिए अप्लाई कर सकते हैं.
हज 2023 के लिए भी रजिस्ट्रेशन शुरू गुरुवार को सऊदी अरब सरकार ने ऐलान किया कि साल 2023 में हज के लिए रजिस्ट्रेशन सर्विस शुरू कर दी गई है. हालांकि, सऊदी अरब के नागरिक और वहां पर रहने वाले मुस्लिम प्रवासी ही हज के लिए अप्लाई कर सकते हैं. सऊदी अरब सरकार की ओर से ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी गई है.
सऊदी सरकार की ओर से अभी दूसरे देशों के लोगों के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू नहीं किए गए हैं. सऊदी में रहने वाले लोग localhaj.haj.gov.sa के जरिए अप्लाई कर सकते हैं.
मालूम हो कि जो लोग सऊदी अरब में ही रहते हैं, उनका हज के लिए चुनाव ऑनलाइन लॉटरी सिस्टम के तहत किया जाता है. अप्लाई करने वालों में जिनका नाम लॉटरी में निकलता है सिर्फ उन्हें ही हज करने की अनुमति दी जाती है. हालांकि, उमराह के लिए ऐसा कोई सिस्टम नहीं है.
#الحج_والعمرة: خطوات #التقديم_على_الحج لمحرم المرأة، الذي ليس لديه أحقيّة في حجّ 1444هـ. pic.twitter.com/3uSUXYcV58

ट्रंप ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे यूरोप से प्यार है लेकिन वह सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है. दुनिया हमें फॉलो कर बर्बादी के रास्ते से बच सकती है. मैंने कई मुल्कों को बर्बाद होते देखा है. यूरोप में मास माइग्रेशन हो रहा है. अभी वो समझ नहीं रहे हैं कि इसके क्या-क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं. यूरोपीयन यूनियन को मेरी सरकार से सीखना चाहिए.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में ग्रीनलैंड को लेकर बड़ा प्रस्ताव रखा है. उन्होंने साफ कहा है कि अगर ग्रीनलैंड अमेरिका को नहीं दिया गया तो वे यूरोप के आठ बड़े देशों पर टैरिफ लगाएं जाएंगे. इस स्थिति ने यूरोप और डेनमार्क को ट्रंप के खिलाफ खड़ा कर दिया है. यूरोप और डेनमार्क ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ट्रंप के इस ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं करेंगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विमान को एक तकनीकी खराबी की वजह से वापस वाशिंगटन लौट आया. विमान को ज्वाइंट बेस एंड्रयूज में सुरक्षित उतारा गया. ट्रंप के एयर फोर्स वन विमान में तकनीकि खराबी की वजह से ऐसा करना पड़ा. विमान के चालक दल ने उड़ान भरने के तुरंत बाद उसमें एक मामूली बिजली खराबी की पहचान की थी. राष्ट्रपति ट्रंप वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की बैठक में शिरकत करने के लिए स्विट्ज़रलैंड के दावोस जा रहे थे.

ग्रीनलैंड में आजादी की मांग दशकों से चल रही है. फिलहाल यह द्वीप देश डेनमार्क के अधीन अर्ध स्वायत्त तरीके से काम करता है. मतलब घरेलू मामलों को ग्रीनलैंडर्स देखते हैं, लेकिन फॉरेन पॉलिसी और रक्षा विभाग डेनमार्क सरकार के पास हैं. अब कयास लग रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद के बीच वहां अलगाववाद को और हवा मिलेगी.

स्विटजरलैंड के दावोस में चल रहे WEF की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप को बताया कि अमेरिका जैसी शक्ति को क्यों कानून आधारित वर्ल्ड ऑर्डर का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में बहुपक्षवाद के बिखरने का डर सता रहा है. मैक्रों ने कहा कि दुनिया में जोर जबरदस्ती के बजाय सम्मान और नियम-आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देने की जरूरत है.

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस भाषण ने उस धारणा को तोड़ दिया कि वेस्टर्न ऑर्डर निष्पक्ष और नियमों पर चलने वाली है. कार्नी ने साफ इशारा किया कि अमेरिका अब वैश्विक व्यवस्था को संभालने वाली नहीं, बल्कि उसे बिगाड़ने वाली ताकत बन चुका है. ट्रंप के टैरिफ, धमकियों और दबाव की राजनीति के बीच मझोले देशों को उन्होंने सीधा संदेश दिया है- खुद को बदलो, नहीं तो बर्बाद हो जाओगे.







