
श्रीलंका: बैरिकेड्स हटाए, टेंट उखाड़े, प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रपति सचिवालय से हटाने पहुंची सेना
AajTak
प्रदर्शनकारियों को हटाने पहुंची पुलिस और सेना ने प्रदर्शनकारियों के टेंट उखाड़ दिए. वहां लगे बैरिकेड्स भी हटा दिए, जिसके बाद कई प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच छोटी-मोटी झड़प भी देखने को मिली.
श्रीलंका में हुए राष्ट्रपति चुनाव के बाद रानिल विक्रमसिंघे नए राष्ट्रपति बन गए हैं. आज उनकी कैबिनेट का शपथ ग्रहण होना है. इससे पहले राष्ट्रपति सचिवालय को प्रदर्शनकारियों से छुड़ाने की कवायद शुरू हो गई है. पिछले 105 दिन से राष्ट्रपति सचिवालय के बाहर धरना-प्रदर्शन कर श्रीलंका के लोगों को हटाने का सिलसिला शुरू हो गया है.
शुक्रवार तड़के कोलंबो में राष्ट्रपति सचिवालय के पास गॉल फेस में हालात तनावपूर्व हो गए. प्रदर्शनकारियों को हटाने पहुंची पुलिस और सेना ने प्रदर्शनकारियों के टेंट उखाड़ दिए. वहां लगे बैरिकेड्स भी हटा दिए, जिसके बाद कई प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच छोटी-मोटी झड़प भी देखने को मिली. इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार भी किया गया.
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि सुरक्षाबलों ने उन पर हमला किया. उन्होंने कहा कि रानिल विक्रमसिंघे प्रदर्शनकारियों को तबाह करना चाहते हैं और इसकी कोशिश भी कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद हम हार नहीं मानेंगे. हम अपने देश को घटिया राजनीति से मुक्त करना चाहते हैं.
रानिल इतने मतों से बने राष्ट्रपति
श्रीलंका की 225 सदस्यों वाली संसद में रानिल विक्रमसिंघे के पक्ष में 134 वोट पड़े. वहीं उनके विरोधी दुल्लास अलहप्परुमा को 82, वामपंथी नेता अनुरा कुमार दिसनायके को मात्र 3 वोट मिले.
जरूरत की चीजों को तरस गए लोग

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके संकेत दिए. उन्होंने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा कि कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं, ऐसा समझौता जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा.

मिडिल ईस्ट क्षेत्र में अमेरिकी फौजी जमावड़े ने स्थिति को काफी संवेदनशील बना दिया है. एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट्स और मिसाइल डिफेंस सिस्टम अलर्ट मोड पर हैं. इसी बीच सोशल मीडिया पर दावा किया गया है कि चीन ने ईरान को अब तक की सबसे बड़ी सैन्य मदद भेजी है, जिसमें 56 घंटे के भीतर चीन के 16 जहाज ईरान पहुंचे. हालांकि इस सूचना की पुष्टि नहीं हुई है.

ईरान की राजधानी तेहरान में होने वाले विरोध प्रदर्शनों ने हालात को काफी गंभीर बना दिया है. जनता और सत्ता पक्ष के बीच भारी तनाव है जबकि अमेरिका भी लगातार दबाव बढ़ा रहा है. ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर तगड़ा हमला किया है. वहीं, अरब सागर की ओर अमेरिकी युद्धपोत की मौजूदगी से क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है.

मिडिल ईस्ट में अमेरिका के बढ़ते सैन्य दबाव के बीच सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि चीन ने ईरान को अब तक का सबसे बड़ा मिलिट्री एयरलिफ्ट भेजा है. 56 घंटों के भीतर चीन के 16 Y-20 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान ईरान पहुंचे. इसके अलावा HQ-9B एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली मिलने की भी चर्चा है जो लंबी दूरी तक दुश्मन के फाइटर जेट्स और मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम मानी जाती है. ऐसे में क्या क्या खुलकर ईरान के समर्थन में उतर गया बीजिंग?

स्विट्ज़रलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से पहले पाकिस्तान पर दबाव और विरोध का स्तर बढ़ गया है. पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट (PTM) और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने स्थानीय सड़कों पर पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए, जिनमें पाकिस्तानी सेना और प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगे. वे आरोप लगाते हैं कि सेना जबरन गायब करने, फर्जी मुठभेड़ों में हत्याओं और खनिज संसाधनों की लूट में शामिल है.








