
शराब घोटाले में ED के समन, अब मोहल्ला क्लीनिक की CBI जांच... 2024 चुनाव से पहले केजरीवाल के सामने बड़ी चुनौतियां
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स्वाति मालीवाल के लिए ये चुनावी राजनीति में पहला कदम है. इससे पहले भी स्वाति आम आदमी पार्टी की सियासी गतिविधियों में भी सक्रिय नहीं रहीं थीं. इसलिए लोकसभा चुनावों से ठीक पहले स्वाति मालीवाल का एक्टिव सियासत में कदम रखना भी आम आदमी पार्टी की अंदरूनी राजनीति में बदलाव के संकेत हो सकते हैं.
दिल्ली की सियासत 2024 की शुरुआत से ही गर्माने लगी है. केजरीवाल साल के आखिरी दिनों में विपाश्यना से लौटे तो ईडी का एक समन उनका इंतज़ार कर रहा था. प्रवर्तन निदेशालय ने 3 जनवरी को पेश होने के लिए कहा, लेकिन केजरीवाल नहीं गए. एक तरफ केजरीवाल ने कहा कि वो तब तक ईडी की जांच में शामिल नहीं होंगे, जब तक एजेंसी उनके द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब नहीं देती. तो दूसरी तरफ रात होते-होते सोशल मीडिया पर आम आदमी पार्टी के नेताओं ने अगली सुबह अरविंद केजरीवाल के घर पर छापेमारी की खबर चला दी. छापेमारी तो हुई नहीं हुई, लेकिन सुबह दूसरी खबर आ गई कि दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिकों में जांच के नाम पर घोटाला हुआ है. मामले की जांच सीबीआई करे ये, अनुशंसा उपराज्यपाल ने कर दी है.
दिल्ली का उपराज्यपाल सचिवालय भी लगातार सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर करने का काम कर रहा है और अब तक आधा दर्जन से भी ज्यादा मामले ऐसे हैं, जिन पर सीबीआई जांच या तो चल रही है या उसकी अनुशंसा कर दी गई है. ऐसे ही नकली दवाओं के एक मामले में सीबीआई ने शुक्रवार को जांच शुरु कर दी. जिसका खुलासा दो हफ्ते पहले ही दिल्ली के विजिलेंस विभाग ने अपनी एक रिपोर्ट में किया था. बात सिर्फ नकली दवाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि नकली नाम और फोन नंबर दर्ज करवा कर मोहल्ला क्लीनिक में हो रही गड़बड़ी का मामला भी सीबीआई को सुपुर्द करने की तैयारी है.
19 जनवरी को राज्यसभा के चुनाव होने हैं. आम आदमी पार्टी ने इसके लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. दिल्ली से राज्यसभा में तीन सांसद होते हैं. आम आदमी पार्टी ने 2 मौजूदा सांसदों संजय सिंह और एनडी गुप्ता को दोबारा राज्यसभा भेजने का फैसला किया है, तो सुशील गुप्ता की जगह अब स्वाति मालीवाल राज्यसभा जाएंगी. सुशील गुप्ता को हरियाणा की जिम्मेदारी दी गई है, जहां लोकसभा चुनावों के अलावा इसी साल विधानसभा चुनाव भी होने हैं.
स्वाति मालीवाल के लिए ये चुनावी राजनीति में पहला कदम है. इससे पहले भी स्वाति आम आदमी पार्टी की सियासी गतिविधियों में भी सक्रिय नहीं रहीं थीं. इसलिए लोकसभा चुनावों से ठीक पहले स्वाति मालीवाल का एक्टिव सियासत में कदम रखना भी आम आदमी पार्टी की अंदरूनी राजनीति में बदलाव के संकेत हो सकते हैं. खास तौर पर उस समय जिस समय केजरीवाल खुद जांच के दायरे में हैं और उनपर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक सकती है.
इस बीच बीजेपी में भी कयासों का दौर गर्म है कि आखिरकार दिल्ली के सातों सांसदों में से कितनों को लोकसभा चुनाव में टिकट मिलेगा और कितनों को नहीं. बीजेपी की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक गुरुवार को हुई तो उसमें युवाओं को जोड़ने से लेकर राम मंदिर में होने वाली प्राण प्रतिष्ठा के दौरान होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तय की गई. लेकिन इस मीटिंग में सांसदों को नहीं बुलाया गया. हो सकता है कि पार्टी मौजूदा सांसदों में से सभी के नहीं, तो कुछ के टिकट काटने पर विचार तो कर ही रही है.
इसी हफ्ते कांग्रेस की गठबंधन पर बनी कमेटी ने भी दिल्ली के कांग्रेस अध्यक्ष को आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर बुलाया. दिल्ली में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी की तुलना में ज्यादा सीटों की डिमांड कर रही है. कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि वो 5 सीटें मांगेंगे और 4 से कम सीटों पर लड़ना मंजूर नहीं होगा. गठबंधन की संभावना दिल्ली में बन तो रही है, लेकिन तय ये होना है कि 4 सीटों पर कौन सी पार्टी लड़ती है और 3 सीटें कौन?

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