
वेनेजुएला अब अमेरिका का 'उपनिवेश', ट्रंप के ऐलान ने काट दिए दुनिया से रिश्ते, क्या है अमेरिकी रणनीति?
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हाल में एक सैन्य ऑपरेशन चलाते हुए अमेरिका ने वेनेजुएला के लीडर निकोलस मादुरो को अरेस्ट कर लिया. नशे की तस्करी का आरोप लगाकर यूएस ने न केवल वेनेजुएला के स्टेट हेड को उठाया, बल्कि साफ कर दिया कि वो इस देश में स्थिरता आने तक रुकेगा. अब डोनाल्ड ट्रंप ने एक और ऐलान कर दिया है, जो आर्थिक साम्राज्यवाद का संकेत है.
दूसरा कार्यकाल शुरू होने के बाद से डोनाल्ड ट्रंप का इकलौता मिशन नोबेल शांति पुरस्कार था. उन्होंने कथित तौर पर कई युद्ध रुकवाए. नोबेल तब भी नहीं मिला. अब ट्रंप प्रशासन मास्क हटाकर अपना विस्तारवादी चेहरा दिखा रहा है. उन्होंने वेनेजुएला के राष्ट्रपति को नशे की तस्करी के आरोप में पकड़कर जेल में डाल दिया. बात यहीं खत्म नहीं हुई. वेनेजुएला में मौजूद तेल भंडार की बिक्री अब से अमेरिका ही करेगा. इससे जो पैसे आएंगे, उनसे अपनी जरूरत का सामान भी यह देश यूएस से ही खरीदेगा.
हिंदी में ऐसी स्थिति के लिए कहा जाता है, हाथ-पैर बांधकर पानी में फेंक देना और फिर डोंगी लेकर मसीहा बन जाना. वेनेजुएला के साथ अभी जो हो रहा है, उसमें उसकी आर्थिक आजादी पूरी तरह से खत्म हो जाएगी. अगर वेनेजुएला अपने तेल भंडार खुद नहीं बेच सकता और उसकी बिक्री किसे और किस कीमत पर होगी, ये अमेरिका देखेगा, तो देश यह तय करने की ताकत खो देगा कि वह किससे व्यापार करेगा और अपनी कमाई कहां खर्च करेगा. ऐसे में सरकार सिर्फ नाम की रह जाती है और असली कंट्रोल बाहर चला जाता है.
बात यहीं खत्म नहीं होती. तेल की बिक्री से जो पैसे आएंगे, वे पैसे अमेरिका वापस वेनेजुएला को देगा, और उन्हीं रुपयों से वेनेजुएला की सरकार अपनी जरूरत का सामान लेगी. इसमें दवा से लेकर अनाज और इलेक्ट्रॉनिक्स तक सबकुछ शामिल है. यानी यह देश अपनी मर्जी से इंपोर्ट और एक्सपोर्ट का अधिकार खोते हुए एब्सॉल्यूट इकनॉमिक कंट्रोल में जा चुका.
इसे आर्थिक साम्राज्यवाद भी कह सकते हैं. देश दिखने में स्वतंत्र होगा लेकिन अपने सबसे जरूरी फैसले खुद नहीं ले सकेगा.
इसका सबसे पहला असर राजनीति पर होगा. देश आजाद होगा लेकिन कहने-भर को. चूंकि उसके सारे रिसोर्स वॉशिंगटन के हाथ में होंगे तो सरकार कौन सी आएगी, ये भी वाइट हाउस ही पक्का करेगा. ऊपर-ऊपर से चुनी हुई सरकार असल में यूएस फ्रेंडली सरकार होगी जो यस बॉस के अलावा कुछ कह नहीं सकेगी.
अभी की स्थिति लें तो मादुरो के अमेरिकी कब्जे में जाने के बाद उपराष्ट्रपति डेल्सी एलोइना रोड्रिग्ज को वहां का कार्य़वाहक राष्ट्रपति बनाया गया. ट्रंप उनपर भी आक्रामक हैं. वे लगातार कह रहे हैं कि अगर रोड्रिग्ज उनकी बात से अलग गईं तो अंजाम मादुरो से भी बुरा होगा. यानी काराकास अब वॉशिंगटन से पूछे बगैर काम नहीं कर सकता.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही मीडिया के सामने सेना भेजने की बात से इनकार किया हो, लेकिन 2,200 मरीन सैनिकों के साथ यूएसएस त्रिपोली युद्धपोत का मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ना कुछ और ही इशारा कर रहा है. ट्रंप का मुख्य मकसद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के तेल मार्ग को ईरान के कब्जे से छुड़ाना और वहां दबे यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करना है. अगर ये सेना तैनात होती है, तो यह पिछले दो दशकों में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य कदम होगा.

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