
राजस्थान में पेपर लीक बनेगा बड़ा चुनाव मुद्दा? BJP घेरने में लगी, गहलोत सरकार लाएगी कानून
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राजस्थान में चुनाव से पहले पेपर लीक के मामलों की गूंज सुनाई देने लगी है. मंगलवार को बीजेपी नेतृत्व ने अजमेर में बड़ा प्रदर्शन किया है और अशोक गहलोत सरकार को घेरने की कोशिश की है. बीजेपी इस मामले के बहाने युवाओं को अपने पाले में करने की कोशिश में लगी है. वहीं, गहलोत सरकार भी पेपर लीक मामले में बड़ा कदम उठाने जा रही है.
राजस्थान में विधानसभा चुनाव हैं. कांग्रेस और बीजेपी दोनों अपनी चुनावी रणनीतियों को जमीन पर उतारने में लगी हैं. इस बीच, राज्य में पेपर लीक के मामलों ने सियासत को गरमा दिया है. पिछले साढ़े चार साल में पेपर लीक के 10 से ज्यादा मामले सामने आए हैं. आगामी चुनाव में यह मामले बड़े मुद्दा बन सकते हैं. यही वजह है कि बीजेपी लगातार कांग्रेस सरकार को घेर रही है. हालांकि, गहलोत सरकार भी कानून लाकर युवाओं को साधने की कोशिश में है.
माना जाता है कि राजस्थान में गहलोत सरकार के मौजूदा कार्यकाल के दौरान बार-बार पेपर लीक के मामले आए, जिसकी वजह से राज्य के 20 लाख से ज्यादा युवा प्रभावित हुए हैं. सत्तारूढ़ सरकार और विपक्ष दोनों को एहसास है कि यह एक ऐसा मुद्दा है जो चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकता है. ऐसे में दोनों दल युवा वर्ग को अपने पाले में करने की कोशिशों में लग गए हैं.
'इस बार चुनाव में युवाओं की बड़ी भूमिका होगी?'
राजस्थान में पेपर लीक मामलों के खिलाफ कई विरोध प्रदर्शनों की अगुवाई करने वाले उपेन यादव कहते हैं कि मैं शुरू से ही कहता रहा हूं कि इस बार चुनाव में युवाओं की बड़ी भूमिका होगी. हमने पेपर लीक को लेकर लगातार आवाज उठाई है. चुनावी साल है, चुनावी माहौल है. हर राजनेता इसमें हिस्सा ले रहा है, बयान दे रहा है. हर कोई कुछ ना कुछ कर रहा है. लेकिन मैं आपको बताना चाहूंगा कि जब 24 दिसंबर को पेपर लीक हुआ तो हम शहीद स्मारक पर मोर्चा खोलने वाले पहले व्यक्ति थे. हमने पेपर लीक के संबंध में, कानून के संबंध में लगातार 10 से 11 विरोध प्रदर्शन किए. यादव ने कहा, जब पेपर लीक होता है तो हर अभ्यर्थी प्रभावित होता है. वह सोचता है कि मैं तैयारी कर रहा हूं लेकिन पेपर लीक होने से क्या होगा.
सचिन पायलट भी उठा चुके हैं सवाल
बता दें कि इससे पहले कई मौकों पर राज्य सरकार ने पेपर लीक के मामलों को रोकने के लिए पूरी तरह से इंटरनेट बंद कर दिया था. लेकिन इसके बावजूद यह एक ऐसा मामला रहा है, जिस पर गहलोत सरकार को ना सिर्फ प्रमुख विपक्ष बीजेपी, बल्कि कांग्रेस के भीतर भी सबसे ज्यादा आलोचना झेलनी पड़ी है. पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कई मौकों पर मांग की है कि बड़ी मछलियों को पकड़ा जाए.

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