
यूपी में 'पोस्ट कोविड ट्रीटमेंट' के लिए नहीं देना होगा पैसा, सरकार फ्री में करेगी इलाज
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प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा आलोक कुमार ने बताया है कि यूपी सरकार की तरफ से उन मरीजों को मुफ्त में इलाज दिया जाएगा जिन्होंने कोरोना पर तो जीत दर्ज कर ली है लेकिन वे फिर भी पोस्ट कोविड ट्रीटमेंट के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं.
उत्तर प्रदेश में कोरोना की स्थिति सुधरती दिख रही है. सक्रिय मरीजों की संख्या भी कम हो गई है और मौत के आंकड़ों में भी गिरावट दर्ज की जा रही है. लेकिन इस समय चुनौती ये है कि कोरोना से ठीक होने के बाद भी मरीज पूरी तरह फिट नहीं हो पा रहे हैं. उन्हें कई दूसरी बीमारियों से लड़ना पड़ रहा है. अब इसी को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से बड़ा फैसला लिया गया है. कहा गया है कि अब पोस्ट कोविड ट्रीटमेंट के लिए मरीज को कोई पैसा नहीं देना होगा. UP govt to provide free treatment to those who have recovered from COVID but have to be admitted to medical college for other post #Covid treatment: Alok Kumar, Principal Secretary Medical Education pic.twitter.com/ECDsASBGrM यूपी में 'पोस्ट कोविड ट्रीटमेंट' फ्री
अहमदाबाद के घाटलोडिया इलाके में नेशनल स्कूल के बाहर दसवीं के छात्र पर जानलेवा हमला हुआ है. परीक्षा खत्म होने के तुरंत बाद 8 से 10 हमलावरों ने छात्र को घेर लिया और उसे स्कूल से लगभग 50 मीटर दूर तक घसीट कर चाकू, पाइप और लकड़ी से बेरहमी से मारा. इस मामले में स्कूल के चार छात्र और उनके साथी शामिल हैं. पुलिस ने बताया कि यह हमला पुरानी रंजिश के कारण हुआ है.

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प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य पद के दावे पर नोटिस जारी किया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के अक्टूबर 2022 के आदेशों का हवाला दिया गया है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि नोटिस सुप्रीम कोर्ट की अवमानना है और उन्होंने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है.

कोर्ट ने पारदर्शी और जवाबदेह प्रणाली बनाने पर जोर दिया ताकि बिना नसबंदी वाले कुत्तों की रिपोर्टिंग हो सके. 28 जनवरी को सरकारों की ओर से सॉलिसिटर जनरल अपनी दलीलें प्रस्तुत करेंगे. कोर्ट ने एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट के पॉडकास्ट पर नाराजगी जताई और मामले की गंभीरता को रेखांकित किया. ये सुनवाई आवारा कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता को जाति के आधार पर अपमानित करने की स्पष्ट मंशा होनी चाहिए। पटना हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एफआईआर और आरोप पत्र में जाति-आधारित अपमान के अभाव को रेखांकित किया। कोर्ट ने एससी एसटी एक्ट की धारा 3(1) के प्रावधानों को दोहराते हुए कहा कि केवल अपशब्दों का प्रयोग अपराध नहीं बनता।








