
मौत भारतीय अलगाववादी की, रो रहे Imran! मिला भारत विरोध का ईनाम
Zee News
Syed Ali Shah Geelani Died: अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी को पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने कश्मीर का स्वतंत्रता सेनानी बताने की कोशिश की.
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी (Syed Ali Shah Geelani) की मौत पर पाकिस्तान (Pakistan) ने ये साबित करने की कोशिश की कि वो भारत और कश्मीर (Kashmir) के नेता नहीं बल्कि पाकिस्तान के नेता थे. पाकिस्तान में उनकी मौत पर एक दिन का राष्ट्रीय शोक भी मनाया गया और पाकिस्तान का राष्ट्रीय ध्वज भी उनके सम्मान में आधा झुका दिया गया. यानी पाकिस्तान में उनकी मौत पर उन्हें ऐसा सम्मान दिया गया, जैसा वहां किसी बड़े नेता की मौत पर दिया जाता है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने तो सैयद अली शाह गिलानी को कश्मीर का स्वतंत्रता सेनानी बताने की कोशिश की और पाकिस्तान के ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने उन्हें पाकिस्तान और कश्मीर का हीरो बताया. हालांकि गिलानी के प्रति पाकिस्तान का ये प्रेम अचानक नहीं जागा है. पिछले साल पाकिस्तान ने उन्हें वहां के सबसे बड़े नागरिक सम्मान निशान ए पाकिस्तान से भी सम्मानित किया था.
Ice Breaker missile: भारतीय नौसेना अब अपने बेड़े को और भी ज्यादा खतरनाक बनाने के लिए एक ऐसे मिसाइल सिस्टम पर विचार कर रही है, जो समंदर के बीचों-बीच दुश्मन के होश उड़ा देगा. खबर आ रही है कि भारतीय नौसेना अपने MH-60R सीहॉक हेलीकॉप्टरों को इजरायल की आधुनिक 'आइस ब्रेकर' मिसाइल से लैस करने की योजना बना रही है. खास बात यह है कि भारतीय वायुसेना पहले ही इस मिसाइल को अपनी ताकत में शामिल करने की मंजूरी दे चुकी है.

Line Replaceable Units: RVAS ने भारत के स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. कंपनी अब तेजस Mk-2 के लिए एक महत्वपूर्ण Line Replaceable Unit के विकास में भागीदार बन गई है. तेजस Mk-2 को भारतीय वायुसेना के भविष्य के बेड़े की रीढ़ माना जा रहा है. तेजस Mk-2 एक मीडियम-वेट, सिंगल इंजन, मल्टी-रोल फाइटर जेट होगा. इसमें नया एयरफ्रेम, ज्यादा ताकतवर इंजन, आधुनिक एवियोनिक्स, स्वदेशी AESA रडार और ज्यादा हथियार ले जाने की क्षमता होगी.

Pakistani Leader Chief Guest in 1955 republic day: यह किस्सा है साल 1955 का. उस समय भारत ने पाकिस्तान के तत्कालीन गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था. उस दौर में भारत अपनी लोकतांत्रिक संस्थाओं और परंपराओं को आकार दे रहा था. मलिक गुलाम मोहम्मद का भारत से पुराना जुड़ाव भी रहा था. उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी.










